डॉ. राजेश्वर सिंह : दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की वैश्विक क्रांति में भारत बने नेतृत्वकर्ता

Lucknow
  • AI, बायोटेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर का संगम बनेगा भविष्य की सबसे बड़ी इंडस्ट्री, युवाओं के लिए खुलेंगे नए अवसर
  • अमरता नहीं, हर नागरिक को मिले स्वस्थ और सम्मानजनक दीर्घायु जीवन

दीर्घायु विज्ञान में बढ़ रहा वैश्विक निवेश

लखनऊ। सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने Longevity Science (दीर्घायु विज्ञान), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बायोटेक्नोलॉजी को भविष्य की सबसे बड़ी संभावनाओं वाला क्षेत्र बताते हुए युवाओं से इस वैश्विक स्वास्थ्य क्रांति का नेतृत्व करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को अब वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचार के जरिए समझने और बेहतर बनाने की दिशा में दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है। द इकोनॉमिस्ट की 3 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष Longevity Biotech कंपनियों ने 18.4 अरब डॉलर का निवेश जुटाया, जो पिछले दस वर्षों के कुल निवेश से भी अधिक है।

AI और बायोटेक्नोलॉजी से बदलेगा मानव जीवन

डॉ. सिंह ने बताया कि Altos Labs ने 2022 में 3 अरब डॉलर जुटाए, जबकि Eli Lilly ने AI आधारित दवा अनुसंधान कंपनी Insilico Medicine के साथ 2.75 अरब डॉलर तक के संभावित समझौते पर हस्ताक्षर किए। Sam Altman समर्थित Retro Biosciences का लक्ष्य मानव जीवन में 10 स्वस्थ वर्ष जोड़ने की संभावनाओं पर अनुसंधान करना है। उन्होंने कहा कि AI आधारित दवा अनुसंधान, बायोलॉजिकल एजिंग क्लॉक्स और Epigenetic Reprogramming भविष्य में बीमारियों की रोकथाम और स्वस्थ जीवन की अवधि बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि, इन तकनीकों की सुरक्षा और प्रभावशीलता के लिए अभी और चिकित्सकीय परीक्षण जरूरी हैं।

भारत के युवाओं के सामने वैश्विक नेतृत्व का अवसर

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत के युवाओं को इस बदलाव का केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता और नेतृत्वकर्ता बनना होगा। AI, बायोटेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य अनुसंधान और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर में निवेश, स्टार्टअप्स तथा कौशल विकास को बढ़ावा देकर भारत वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकता है। उन्होंने आगाह किया कि अप्रमाणित उपचारों और महंगे व्यावसायिक दावों से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति का उद्देश्य अमरता नहीं, बल्कि हर नागरिक को स्वस्थ, सक्रिय और सम्मानजनक दीर्घायु जीवन देना होना चाहिए। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और नशामुक्त जीवनशैली इसकी बुनियाद हैं।