बरेली में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में बड़ा झोल सामने आया है। करीब 149 किसानों की मौत के बाद भी उनके बैंक खातों में किसान सम्मान निधि जाती रही। फॉमर रजिस्ट्री से इसका खुलासा हुआ तो कृषि विभाग में खलबली मच गई। कार्रवाई के डर से मृतक किसानों के परिवार भी बेचैन हो उठे। आखिर में डर के कारण मृतक किसानों के परिजनों ने करीब 12.90 लाख रुपये सरेंडर किए हैं।
इस वक्त पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत लाभार्थियों के सत्यापन का काम चल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, जिले में 5.45 लाख किसान लाभर्थी हैं। इसमें 2.95 लाख किसानों को 23वीं किस्त मिली थी। करीब 1,96,188 किसानों की निधि को लेकर विभिन्न खामिया हैं, जिन्हें दूर करने के बाद निधि जारी की गई थी।इस दौश्रान जांच में पता चला कि जिले में 149 किसान ऐसे भी है, जिनकी मौत हो चुकी है, लेकिन निधि अभी भी जारी हो रही है।
जांच में पुष्टि के बाद कृषि विभाग ने मृतक किसानों के परिजनों इस संबंध में पूछताछ की। बताते हैं कि कार्रवाई के डर से सभी परिवारों ने रकम वापस कर दी है। वहीं, यह प्रकरण सामने आने के बाद कृषि विभाग अब और गहनता के साथ इसकी जांच में जुट गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किसी मृतक किसान के बैंक खातें में कोई रकम तो नहीं जा रही है।
उप कृषि निदेशक ओपी मिश्र ने बताया कि 149 मृत किसानों के परिजनों से करीब 12.90 लाख रुपये सरेंडर कराए जा चुके हैं। दस्तावेजों की जांच के बाद इनसे रकम की वसूली की जा रही है। कुछ परिवारों में एक से अधिक सदस्यों के योजना का लाभ लेने की शिकायतें मिली हैं। तहसील स्तर पर गहन सत्यापन जारी है और रिपोर्ट के आधार पर अपात्रों व धांधली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फार्मर रजिस्ट्री ने खोली पोल, ऐसे रुका फर्जीवाड़ा
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में हो रही सेंधमारी को रोकने के लिए सरकार द्वारा ”फार्मर रजिस्ट्री” को अनिवार्य किया गया है। इसी डिजिटल व्यवस्था ने फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ कर दिया। राजस्व और कृषि विभाग के रिकॉर्ड का डिजिटल मिलान होते ही मृत किसानों के नाम उजागर हो गए।
डिजिटल प्रणाली ने 148 मृतकों की किस्तों पर रोक लगाई और तहसील स्तर पर जांच बिठाई तो अवैध लाभ उठा रहे परिजनों के पसीने छूट गए। कानूनी कार्रवाई के डर से परिजनों ने चुपचाप रुपये कृषि विभाग में जमा करा दिए। बहरहाल अभी अन्य खातों की भी जांच की जा रही है।
