प्रयागराज में राहुल गांधी का युवाओं से आह्वान, बोले- नफरत नहीं मोहब्बत से बदलें व्यवस्था; काला झंडा दिखाने का प्रयास

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को प्रयागराज में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं से मौजूदा व्यवस्था को बदलने के लिए नफरत के बजाय प्यार और मोहब्बत का रास्ता अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की लड़ाई में वह उनके साथ खड़े हैं और आगे भी खड़े रहेंगे। राहुल गांधी ने रोजगार, शिक्षा, डेटा और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा।

केपी ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा कि देश के युवाओं के पास क्षमता और डेटा है, लेकिन व्यवस्था ने उन्हें एक तरह के ‘चक्रव्यूह’ में फंसा रखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसी व्यवस्था के कारण रोजगार के अवसर कम हुए हैं और विश्वविद्यालयों पर भी नियंत्रण बढ़ा है।

‘डेटा आपका, दर्द आपका और दौलत इनकी?’

राहुल गांधी ने मंच पर लगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की तस्वीरों की ओर इशारा करते हुए कहा कि डेटा और क्षमता युवाओं की है, लेकिन दौलत और तंत्र कुछ लोगों के हाथ में है। उन्होंने कहा कि युवाओं को इस व्यवस्था को समझने और इसे बदलने की जरूरत है।

उन्होंने दिल्ली में हुए युवाओं के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं ने अंधेरे में टॉर्च जलाने का काम किया और देश के छात्रों को जगाया। राहुल ने कहा कि युवाओं ने डर का सामना किया और अपनी आवाज नफरत के साथ नहीं, बल्कि मोहब्बत के साथ उठाई।

‘मोहब्बत की दुकान खोलनी है’

कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत की संस्कृति सत्य और अहिंसा की है। किसी भी छात्र के मन में नफरत नहीं होनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से कहा कि उन्हें प्यार के साथ अपनी लड़ाई लड़नी है। राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं को व्यवस्था में बदलाव के लिए एकजुट होकर अपनी आवाज उठानी होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस संघर्ष में वह उनके साथ खड़े रहेंगे।

डेटा को बताया देश की ताकत

राहुल गांधी ने भारत के विशाल डेटा को देश की पूंजी और ताकत बताते हुए कहा कि 21वीं सदी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का विकास डेटा के आधार पर हो रहा है। ऐसे में देश के भविष्य का निर्माण डेटा और युवाओं की क्षमता से होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं का डेटा उनसे लेकर बड़ी कंपनियों को दिया जा रहा है और उन्हें लगातार रील देखने और बनाने में उलझाया जा रहा है। राहुल ने इसे 21वीं सदी का ‘नशा’ करार दिया।