महाराष्ट्र के कई लोग लापता… कैलाश मानसरोवर यात्रा गए थे, संपर्क न होने से परिवार बैचेन

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नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए महाराष्ट्र के कई यात्रियों से अभी तक उनके परिवारवालों का संपर्क नहीं हो पाया है, जिससे परिजनों की चिंता बढ़ती जा रही है. नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद महाराष्ट्र के पुणे, मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई सहित राज्यभर के कई यात्री प्रभावित इलाकों में फंस गए हैं.

कुछ यात्रियों के सुरक्षित होने की जानकारी सामने आई है, जबकि कई लोगों से अब तक संपर्क नहीं हो पाया है. पुणे जिले के व्यंकटराम अन्नमदेवरा और अनघा अन्नमदेवरा अभी भी लापता हैं. कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए व्यंकटराम अन्नमदेवरा (52) और उनकी पत्नी अनघा अन्नमदेवरा (49) 67 यात्रियों के एक समूह का हिस्सा थे.

आखिरी बार कब देखा गया था दंपति को?

जानकारी के मुताबिक, दंपति को 26 अगस्त की सुबह 8:27 बजे नेपाल-तिब्बत सीमा के रसुवागढ़ी इलाके में आखिरी बार देखा गया था. फिर इलाके में आई बाढ़ के बाद परिवार का दोनों से संपर्क टूट गया. उनकी बेटी तन्वी अन्नमदेवरा ने दोनों के बारे में जानकारी मिलने पर लोगों से प्रशासन को सूचित करने की अपील की है.

नेपाल में कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई के करीब 60 यात्रियों से भी संपर्क नहीं हुआ है. इनकी मलबे और कीचड़ में दबकर मौत हो जाने की आशंका जताई जा रही है. हालांकि, इन यात्रियों की मौत की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. ये सभी यात्री अंधेरी के डॉक्टर मिलिंद चितले की हिल एंड ट्रैकिंग कंपनी के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे.

राहत और बचाव अभियान में मुश्किलें

26 अगस्त की सुबह करीब साढ़े आठ बजे ये यात्री नेपाल-चीन सीमा के पास कस्टम और इमिग्रेशन भवन के आसपास पहुंचे थे. इसी दौरान पहाड़ से भारी मात्रा में मलबा, मिट्टी और चट्टानें नीचे आई. आशंका है कि कई यात्री भारी मलबे के नीचे दबे गए. करीब 90 किलोमीटर के रास्ते में जगह-जगह कीचड़, मिट्टी और पत्थरों का मलबा जमा होने के कारण राहत और बचाव अभियान में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं.

प्रभावित इलाके की भौगोलिक स्थिति और भारी मलबे के कारण बचाव दल के सामने बड़ी चुनौती है. कुछ इलाकों तक जमीन के रास्ते पहुंचना मुश्किल हो रहा है, जिसके चलते हेलिकॉप्टर के जरिए सर्च ऑपरेशन पर निर्भरता बढ़ गई है. परिवारों के मुताबिक, उनको नेपाल में स्थानीय स्तर पर लापता यात्रियों की रिपोर्ट दर्ज कराने और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करने के लिए कहा गया है. इस स्थिति ने परिजनों की चिंता और बढ़ा दी है.

ठाणे के 12 में 10 यात्रियों से नहीं हुआ है संपर्क

ठाणे जिले से भी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए यात्रियों को लेकर परिजनों में चिंता बनी हुई है. शुरुआती जानकारी में यहां के 12 यात्रियों के यात्रा में फंसे होने की बात सामने आई थी. इनमें से दो लोगों से संपर्क होने और उनके तिब्बत में सुरक्षित होने की जानकारी मिली है. बाकी लोगों से संपर्क नहीं हो पाने की बात कही जा रही है. यात्रियों की सही संख्या और स्थिति को लेकर प्रशासन तथा यात्रा आयोजकों से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है.

जानकारी के अनुसार, ठाणे जिले के कुछ यात्री 23 अगस्त को मुंबई से ऋचा टूर एंड ट्रैवल्स के माध्यम से नेपाल होते हुए कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए रवाना हुए थे. इनमें ठाणे शहर के साथ-साथ जिले के अलग-अलग इलाकों के यात्री शामिल थे. ठाणे शहर के समतानगर निवासी रेखा पाटणकर और उनके पति विनायक सतीश पाटणकर भी यात्रा में शामिल थे.

यात्रियों के परिवारों में बेचैनी

इसके अलावा घंटाली सहनिवास निवासी अपर्णा समीर जोशी और मुकुंद समीर जोशी भी यात्रा पर गए थे. बालकुम के रहेजा कॉम्प्लेक्स निवासी रजनीश रघुनाथ नाटू भी इसी यात्रा में शामिल थे. नेपाल में आपदा की खबर सामने आने के बाद से इनके परिवार का भी इनसे संपर्क नहीं हो पाया है. नेपाल में आपदा की खबर के बाद से इन यात्रियों के परिवारों में बेचैनी का माहौल है.

मोबाइल फोन बंद होने और संपर्क नहीं हो पाने के कारण परिजन लगातार यात्रा आयोजकों और प्रशासन से जानकारी मांग रहे हैं. कुछ परिवारों तक यात्रियों की तस्वीरें या अन्य सूचनाएं पहुंची हैं, लेकिन परिवार अपने परिजनों से सीधे संपर्क होने का इंतजार कर रहे हैं. यात्रियों के परिजन नेपाल से आने वाली हर सूचना पर नजर बनाए हुए हैं.

परिजन अपनो के लिए कर रहे हैं प्रार्थना

परिजनों की प्रार्थना है कि नेपाल में फंसे उनके अपने सुरक्षित हों और जल्द से जल्द अपने उनसे संपर्क करें. फिलहाल महाराष्ट्र के इन यात्रियों की मौत की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. नेपाल प्रशासन, भारतीय अधिकारियों और यात्रा आयोजकों की ओर से आधिकारिक जानकारी देने के बाद ही लापता यात्रियों की वास्तविक संख्या और उनकी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.