उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम और वाहन सुरक्षा को लेकर उपभोक्ता फोरम ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग प्रथम ने सड़क हादसे में कार का एयरबैग न खुलने पर कड़ा रुख अपनाया। आयोग ने कार निर्माता कंपनी व डीलर की लापरवाही को क्षमा योग्य नहीं माना और पीड़ित के पक्ष में फैसला सुनाया।
कोर्ट ने कंपनी को कार का बीमित घोषित मूल्य 6,36,794 रुपये लौटाने, उस पर आठ प्रतिशत की दर से ब्याज देने के साथ ही मानसिक व शारीरिक परेशानी पर 2.20 लाख के अर्थदंड का आदेश दिया है। फोरम का यह आदेश सभी कार मालिकों व वाहन निर्माताओं के लिए नजीर है, जो सुरक्षा के दावों को विज्ञापन तक ही सीमित रखते हैं।
पनकी के रतनपुर कॉलोनी निवासी रूप नारायण वर्मा ने 16 मई 2024 को जिला उपभोक्ता फोरम में सिविल लाइन स्थित आरएनजी ऑटो मोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड व संबंधित कार निर्माता कंपनी के खिलाफ एक याचिका दाखिल की थी। याचिका के अनुसार उन्होंने बताया कि परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते उन्होंने 8,06,085 रुपये में एक कार खरीदी थी।
कार खरीदते समय कंपनी के सेल्स एग्जीक्यूटिव्स ने बताया था कि आधुनिक सुरक्षा मानकों से वाहन परिपूर्ण है। इसमें एडवांस एयरबैग सिस्टम लगा है, जो किसी भी विपरीत परिस्थिति व दुर्घटना के समय यात्रियों की जान बचाने में सक्षम है। उन्होंने कंपनी के दावों व सुरक्षा बंदोबस्त पर विश्वास करके कार खरीदी थी।
उन्होंने बताया कि 15 जनवरी 2023 को उनका बेटा अपने दोस्तों के साथ कार से अयोध्या दर्शन करने जा रहा था। रास्ते में अचानक कार के सामने नीलगाय आ गई। जिस कारण कार अनियंत्रित हो गई और नीलगाय से टकराते हुए दुर्घटनाग्रस्त हो गई। कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। चौंकाने वाली बात यह है कि कार में बैठे लोगों ने सुरक्षा नियमों का पालन किया था। सीटबेल्ट लगाए थे। सीटबेल्ट लगी होने के कारण एयरबैग खुल जाने चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सुरक्षा तंत्र फेल साबित हुआ। एयरबैग न खुलने से कार चला रहा बेटा गंभीर घायल हुआ और उसकी मौत हो गई।
दावों व लापरवाही पर कानूनी लड़ाई का लिया फैसला
रूप नारायण के अनुसार बेटे की मौत का गम और ऑटो मोबाइल्स प्राइवेट लिमिटेड के दावों से आहत होकर उन्होंने कानूनी लड़ाई का फैसला लिया। उन्होंने फोरम के सामने अपनी बात रखी। बताया कि कार खरीदते समय कंपनी की ओर से दिए गए सुरक्षा वादे असत्य, भ्रामक व कागजी निकले। अगर हादसे के समय एयरबैग खुल जाता तो उनका बेटा मौजूद होता। कार की पूरी कीमत दिलाने, मानसिक, शारीरिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति की मांग की।
नोटिस के बाद भी नहीं आई कंपनी
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने आरएनजी ऑटोमोबाइल्स और संबंधित कार कंपनी को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने व एयरबैग न खुलने का तकनीकी वजह बताने का समय दिया। नोटिस के बाद भी कंपनी का कोई प्रतिनिधि, वकील आयोग के समक्ष हाजिर नहीं हुआ। कंपनी की ओर से न ही कोई लिखित जवाब दिया गया। कंपनी के इस रवैया को देखते आयोग ने मामले में जल्द न्याय के मकसद से एकपक्षीय सुनवाई की।
उपभोक्ता आयोन ने सुनाया फैसला
आयोग ने वादी के प्रस्तुत दस्तावेजों, पुलिस एफआईआर, दुर्घटना की तस्वीरें व बीमा कंपनी की रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन किया। इसके बाद आयोग इस नतीजे पर पहुंचा कि जब चालक ने सीटबेल्ट लगाई थी तो टक्कर के बाद सीट बेल्ट क्यों नहीं खुली। जबकि कार का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। एयरबैग का न खुलना सीधे तौर पर वाहन के निर्माण या सुरक्षा तंत्र की खराबी को दर्शाता है।
