साध्वी प्राची बोलीं, लव जिहाद फैलानी वाली टिकटॉक का करें बहिष्कार

Lucknow UP

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालही में स्वदेशी अपनाने की बात कही तो देशभर में एक बार फिर विदेशी कंपनियों का बहिष्कार शुरू हो गया। विश्व हिंदू परिषद की फायरब्रांड नेता डॉ. साध्वी प्राची ने कहा कि आज हम सब एक सब संकल्प लें। साध्वी ने कहा कि चाइना जिसने पूरे विश्व में हाहाकार मचाने का काम किया है। चाइना ने मानवता को शर्मसार करने का काम किया।

इसी चाइना की कंपनी टिकटॉक ने हिंदुस्तान में लव जिहाद, एसिड जिहाद फैला रही है। इस टिकटॉक कंपनी का बहिष्कार करें। क्योंकि विदेशी कंपनी हो या नेता हम उनका ​बहिष्कार करने का संकल्प लें। जब तक ये टिकटॉक भारत में प्रतिबंधित न हो तब तक हम रिट दायर करते रहें।

आपको बता दें कि साध्वी प्राची कट्टर हिंदुवादी नेता हैं। उन्होंने एक वीडियो जारी करके स्वदेशी अपनाने की बात कही है। साथ ही चीन के टिकटॉक के प्रयोग से बचने की सलाह दी है। साध्वी की इस सलाह के बाद तमाम उनके समर्थकों ने टिकटॉक अनइंस्टॉल करना शुरू कर दिया है।


क्या है टिकटॉक

टिक टॉक एक सोशल मीडिया ऐप है जिससे लघु लिप-सिंक, कॉमेडी और प्रतिभा वीडियो बनाया जाता है। देखते ही देखते यह चीनी ऐप पूरी दुनिया में छा गया है। ऐप को 2017 में चीनी डेवलपर बाइटडांस द्वारा चीन के बाहर के बाजारों के लिए लॉन्च किया गया था। बाइटडांस ने पहले डॉयेन (सितंबर 2016 में चीन के बाजार के लिए) को प्रारम्भ किया। टिकटॉक और डॉयेन समान हैं लेकिन चीनी सेंसरशिप प्रतिबंधों का पालन करने के लिए विभिन्न सर्वरों पर चलते हैं। यह एप्लिकेशन उपयोगकर्ताओं को 3 से 15 सेकंड के लघु संगीत और लिप-सिंक वीडियो बनाने की अनुमति देता है[3][4] और 3 से 60 सेकंड के छोटे लूपिंग वीडियो। यह एशिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और दुनिया के अन्य हिस्सों में लोकप्रिय है।

अक्टूबर 2018 में अमेरिका में ये सबसे अधिक डाउनलोड किया जाने वाला ऐप बन गया, ऐसा करने वाला पहला चीनी ऐप। यह 150 से अधिक बाजारों और 75 भाषाओं में उपलब्ध है।

कानूनी मुद्दे
इंडोनेशिया में प्रतिबंध
इंडोनेशिया ने 3 जुलाई 2018 को अश्लील वीडियो और ईश निंदा जैसी अवैध सामग्री के बारे में सार्वजनिक चिंता के बीच टीकटोक ऐप को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। नकारात्मक सामग्री को हटाने, सरकारी संपर्क कार्यालय खोलने, और उम्र प्रतिबंध और सुरक्षा तंत्र को लागू करने सहित कई बदलाव करने के एक सप्ताह बाद ऐप को अनब्लॉक कर दिया गया था।

भारत में संक्षिप्त प्रतिबंध
3 अप्रैल 2019 को, मद्रास उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत सरकार से “अश्लील साहित्य को प्रोत्साहित करने” का हवाला देते हुए ऐप पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा था। अदालत ने यह भी कहा कि ऐप का उपयोग करने वाले बच्चों को यौन शिकारियों द्वारा लक्षित किए जाने का खतरा था। अदालत ने प्रसारण मीडिया को आगे कहा कि उन वीडियो में से कोई भी ऐप से टेलीकास्ट न करे। टिकटोक के प्रवक्ता ने कहा कि वे स्थानीय कानूनों का पालन कर रहे थे और कार्रवाई करने से पहले अदालत के आदेश की प्रति का इंतजार कर रहे थे। 17 अप्रैल को, Google और Apple दोनों ने TikTok को Google Play और ऐप स्टोर से हटा दिया। जैसा कि अदालत ने प्रतिबंध पर पुनर्विचार करने से इनकार कर दिया, कंपनी ने कहा कि उन्होंने 6 मिलियन से अधिक वीडियो हटा दिए थे जो उनकी सामग्री नीति और दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते थे।

25 अप्रैल 2019 को, तमिलनाडु में एक अदालत द्वारा TikTok डेवलपर बायेडेंस टेक्नोलॉजी से एक याचिका के बाद ऐप स्टोर और Google Play से ऐप के डाउनलोड को प्रतिबंधित करने के अपने आदेश को रद्द करने के बाद प्रतिबंध हटा लिया गया था। भारत के TikTok प्रतिबंध की कीमत ऐप के 15 मिलियन नए उपयोगकर्ताओं को हो सकती है।