जिसे दुनिया ने ठुकराया, हरिद्वार में उसे किसने अपनाया… कहानी सुरेंद्र कोली के दोस्त की, जिसकी वजह से शुरू हुई थी दूसरी जिंदगी

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निठारी कांड से जुड़े रहे सुरेंद्र कोली की मौत हो गई. उसका शव हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में चाय की दुकान के अंदर फांसी के फंदे पर लटका मिला. सुरेंद्र ने यह दुकान महज चार दिन पहले ही शुरू की थी. वह हरिद्वार में अपनी पहचान छिपाकर ‘सदा राम’ के नाम से रह रहा था, लेकिन यह कोई नहीं जानता था कि सुरेंद्र ने यहां अपना एक जिगरी दोस्त भी बना लिया था. इस दोस्त का नाम धर्मेंद्र कौशिक है. धर्मेंद्र से ही वह अपने सुख-दुख बांटता था. धर्मेंद्र ने ही उसे चाय की दुकान दिलवाई थी.

सुरेंद्र ने दुकान मालिक को अपना आईडी कार्ड नहीं दिया था तो धर्मेंद्र गारंटर बन गया था, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि धर्मेंद्र को सुरेंद्र की असली पहचान ही नहीं पता थी. वह उसे अपना जिगरी दोस्त ‘सदा राम’ जानता था. दुकान में सदा राम के नाम से एक वोटर आईडी कार्ड भी मिला. साथ ही सुरेंद्र कोली के नाम से आधार कार्ड मिला है. अब जब असलियत सामने आई है तो धर्मेंद्र ने अपने जिगरी दोस्त के जीवन से जुड़ी काफी बातें साझा की हैं…

15 दिन पहले दोस्त से मांगी थी मदद

धर्मेंद्र कौशिश ने बताया कि सुरेंद्र करीब 15 दिन पहले उसके संपर्क में आया था. उसने धर्मेंद्र से कहा था कि सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी उससे नहीं हो पा रही है. वह काफी परेशान है. उसने धर्मेंद्र से कोई दुकान दिलाने की बात कही थी. धर्मेंद्र ने बताया कि उसने अपनी गारंटी पर सुरेंद्र को चाय की दुकान दिलवाई. दुकान शुरू करने के लिए जरूरी सामान भी उसने ही उपलब्ध कराया था. धर्मेंद्र ने सुरेंद्र से कहा था कि अब अपना काम चलाओ और आराम से जिंदगी जियो. इसके बाद सुरेंद्र ने चाय की दुकान शुरू कर दी.

सदा राम के नाम से रह रहा था सुरेंद्र

धर्मेंद्र के मुताबिक, सुरेंद्र हरिद्वार में सदा राम के नाम से रह रहा था. वह एक सोसाइटी में गेटकीपर की नौकरी करता था. दुकान लेने के दौरान मालिक ने सुरेंद्र से आईडी मांगी थी, लेकिन उसने कहा था कि फिलहाल उसके पास आईडी नहीं है. बाद में आईडी मंगवा देगा. इसके बाद धर्मेंद्र ने अपनी आईडी देकर उसकी गारंटी ली. धर्मेंद्र का कहना है कि सुरेंद्र का व्यवहार काफी अच्छा था. वह किसी से ज्यादा मतलब नहीं रखता था. सामान्य तरीके से अपनी जिंदगी शुरू करने की कोशिश कर रहा था. उसने रोशनाबाद में रहने के लिए किराए पर एक कमरा भी ले रखा था.

पता नहीं था ये निठारी कांड वाला सुरेंद्र कोली…

धर्मेंद्र ने बताया कि उसे भी शुरुआत में यह जानकारी नहीं थी कि सदा राम के नाम से रहने वाला व्यक्ति निठारी कांड से जुड़ा सुरेंद्र कोली है. उसकी पहचान का पता अब उसकी मौत के बाद चला. धर्मेंद्र के मुताबिक, सुरेंद्र का व्यवहार इतना अच्छा था कि जो भी उससे बात करता, उससे प्रभावित हो जाता था. वह शांत रहता था और किसी से विवाद नहीं करता था. धर्मेंद्र ने बताया कि सुरेंद्र अपनी जिंदगी को नए सिरे से शुरू करना चाहता था.

2 दिन से परेशान था, परिवार से हुई थी बहस

धर्मेंद्र ने बताया कि सुरेंद्र पिछले दो दिनों से काफी परेशान था. परिवार में बच्चे के जन्मदिन को लेकर भी वह तनाव में था. मौत से एक दिन पहले परिवार के लोगों से उसकी फोन पर बहस हुई थी. हालांकि, बहस किस बात को लेकर हुई थी, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है.

सुबह दुकान नहीं खुली तो दोस्त ने तोड़ा शटर

धर्मेंद्र के मुताबिक, शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे वह सुरेंद्र की दुकान पर पहुंचा. वहां कुछ ग्राहक बैठे थे. उन्होंने बताया कि आज चाचा ने दुकान नहीं खोली है. उसने शटर पर दो-चार बार हाथ मारा, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद उसने शटर पर जोर-जोर से लात मारी. शटर खुल गया. अंदर झांककर देखा तो सुरेंद्र पड़ा हुआ दिखाई दिया. अंदर जाने पर पता चला कि उसने फांसी लगा ली थी. इसके बाद उसने पुलिस को सूचना दी. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और मामले की जांच शुरू कर दी. सुरेंद्र की मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही साफ होगी.