पेरिस। बच्चों को ऑनलाइन जाल में फंसाकर उनका यौन उत्पीड़न और यातना देने के गंभीर मामले में फ्रांस की एक अदालत ने भारतीय युवक रोहन राणे (29) को 20 साल कैद की सजा सुनाई है। अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में बच्चों के उत्पीड़न से जुड़े अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क में उसकी संलिप्तता सामने आई थी। इस नेटवर्क पर बच्चों को हिंसक और यौन गतिविधियों वाले वीडियो बनाने के लिए मजबूर करने का आरोप है।
डिस्कॉर्ड के जरिए बच्चों को जाल में फंसाता था गिरोह
‘द एसोसिएटेड प्रेस’ के पास मौजूद अदालती दस्तावेजों के अनुसार, बाल पीड़ितों को ऑनलाइन मंच ‘डिस्कॉर्ड’ के जरिए इस नेटवर्क में शामिल किया गया था, ताकि उन्हें ‘सीवीएलटी’ नामक समूह का ‘गुलाम’ बनाया जा सके। गिरोह पर बच्चों को हिंसक और यौन गतिविधियों से जुड़े वीडियो बनाने के लिए मजबूर करने का आरोप था। इस समूह के कम से कम तीन अन्य सदस्यों को अमेरिका में गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में सामने आए आरोपों ने ऑनलाइन मंचों के जरिए बच्चों को निशाना बनाने वाले संगठित अपराधों की गंभीरता को उजागर किया है।
अदालत ने सुनाई अधिकतम 20 साल की सजा
अमेरिका के पांच पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील हिप्पोलिट मारकेटी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन गिरोह के सदस्यों में से एक रोहन राणे (29) को नाबालिग से यौन उत्पीड़न और यातना देने के कृत्यों का दोषी पाया गया। राणे को 20 साल की कैद की सजा सुनाई गई, जो उस पर लगे आरोपों के तहत अधिकतम सजा है। अदालत में मौजूद लोगों के अनुसार, शुक्रवार रात अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने का फैसला सुनाए जाने पर राणे ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। बच्चों के साथ दुर्व्यवहार से जुड़े इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए न्यायाधीशों ने एक असामान्य कदम उठाते हुए मुकदमे की सुनवाई बंद कमरे में करने का आदेश दिया था।
2021 में फ्रांस के एंटीब में हुई थी गिरफ्तारी
मूलरूप से महाराष्ट्र के पुणे का रहने वाला राणे उस समय फ्रांस में पढ़ाई कर रहा था। अमेरिकी अधिकारियों से मिली सूचना के बाद, 2021 में फ्रांस के दक्षिणी शहर एंटीब में पुलिस ने राणे को गिरफ्तार किया था। फ्रांसीसी अधिकारियों ने प्रत्यर्पण पर विचार करने से पहले फ्रांस में उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमे की कार्यवाही पूरी करने का फैसला किया। अब अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
पीड़ितों की जिंदगी पर पड़ा गंभीर असर
अमेरिका के पांच पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील हिप्पोलिट मारकेटी ने कहा कि बच्चों को गंभीर नुकसान पहुंचा है और उनकी जिंदगी पूरी तरह बिखर गई है। अमेरिका के पांच पीड़ितों की ओर से पैरवी कर रहे वकील मारकेटी ने कहा, “पीड़ितों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। उनकी जिंदगी पूरी तरह बिखर गई है।” यह मामला इस बात की गंभीर चेतावनी है कि ऑनलाइन मंचों का इस्तेमाल बच्चों को निशाना बनाने और उनका शोषण करने के लिए भी किया जा सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति सतर्कता, संदिग्ध संपर्कों की पहचान और समय पर शिकायत ऐसे अपराधों से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
