बाराबंकी जिले की रामनगर तहसील के सेमराय गांव में सरकारी जमीन पर कब्जे और आम रास्ता बंद किए जाने का आरोप लगाते हुए स्वाति सिंह पिछले पांच साल से अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं। उनका आरोप है कि गाटा संख्या 686 की करीब 9.127 हेक्टेयर जमीन पर शिवप्रसाद सिंह और श्रवण कुमार सिंह ने कब्जा कर रखा है। श्रवण कुमार सिंह रामनगर तहसील में संविदा पर अमीन के पद पर कार्यरत बताए गए हैं। स्वाति का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद मामले में निष्पक्ष जांच नहीं हो रही और बार-बार एक जैसी रिपोर्ट लगाकर प्रकरण को निस्तारित करने का प्रयास किया जा रहा है।
50 शिकायतों के बाद भी नहीं मिला समाधान
स्वाति सिंह के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2021 से जिलाधिकारी कार्यालय, आईजीआरएस पोर्टल और तहसील स्तर पर करीब 50 प्रार्थना पत्र दिए हैं। इसके बावजूद अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका आरोप है कि जांच के नाम पर ऐसी रिपोर्ट लगाई जा रही हैं, जिनमें वास्तविक स्थिति का सही आकलन नहीं किया गया। उन्हें न तो मौके पर जांच के दौरान बुलाया गया और न ही अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया।
स्वाति का कहना है कि वर्ष 2021 में दिए गए प्रार्थना पत्र पर वर्ष 2023 में की गई कार्रवाई के दौरान रिपोर्ट में विपक्षियों का काफी अरसे से कब्जा होना बताया गया था। इसके बाद वर्ष 2023 में ही तहसील प्रशासन के संरक्षण में एक दुकान का निर्माण कराए जाने का आरोप है। बाद में एक अन्य रिपोर्ट में करीब 60 वर्गमीटर जमीन पर कब्जे का उल्लेख किया गया और धारा 145 के तहत मुकदमा चलने की बात कही गई।
कहीं 60 वर्गमीटर कब्जे का जिक्र, तो कहीं बाउंड्रीवॉल पर सवाल
स्वाति इस रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहती हैं कि मौके पर बनी बाउंड्रीवॉल तक कब्जे का दायरा 60 वर्गमीटर ही है या उससे अधिक, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका दावा है कि उन्होंने मौके का वीडियो भी बना रखा है, जिससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उन्होंने मांग की है कि अधिकारियों की मौजूदगी में मौके की पैमाइश कराई जाए और उन्हें भी जांच के समय बुलाकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
स्वाति सिंह ने संबंधित लेखपाल पर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि शिकायत करने पर लेखपाल का कथित तौर पर कहना है कि आवेदन कहीं भी दिया जाए, जांच के लिए उसके पास ही आएगा और कार्रवाई उसे ही करनी है। स्वाति को आशंका है कि विपक्षियों के तहसील में कार्यरत होने और उनके कथित राजनीतिक प्रभाव के कारण मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और विपक्षियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
लेखपाल पर भी लगाए आरोप
स्वाति सिंह ने बताया कि वह प्रयागराज में नौकरी करने के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रही हैं। गांव में उनकी माताजी अकेली रहती हैं। ऐसे में उन्हें प्रयागराज से बार-बार गांव आकर शिकायतों के संबंध में अधिकारियों से संपर्क करना पड़ता है। उनका कहना है कि पांच साल से लगातार प्रयास करने के बावजूद समाधान नहीं होने से वह परेशान हो चुकी हैं। स्वाति के मुताबिक, वह हाल ही में अपनी शिकायत लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचीं, जहां जिलाधिकारी से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। वहां मौजूद महिला अधिकारी ने उनकी शिकायत पर रामनगर के एसडीएम को भेजने की बात कही और आश्वासन दिया कि जांच के लिए बुलाए जाने पर वह उपस्थित हो जाएं।
नौकरी और पढ़ाई के बीच गांव के चक्कर काटने को मजबूर
स्वाति सिंह ने जिलाधिकारी से मांग की है कि गाटा संख्या 686 की जमीन और बंद किए गए आम रास्ते की निष्पक्ष जांच कराई जाए। मौके पर राजस्व टीम भेजकर वास्तविक कब्जे की पैमाइश हो, शिकायतों पर लगाई गई पूर्व रिपोर्टों की भी जांच की जाए और कार्रवाई के दौरान उन्हें सूचित कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए। स्वाति का कहना है कि यदि जांच में कब्जे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर दी जाए और नियमानुसार कार्रवाई हो, तो उन्हें स्वीकार होगा। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और उन्हें न्याय मिले।
