सीएमओ के मुताबिक, उल्टी की शिकायत अधिक होने और दवा नहीं पचा पाने के कारण 17 लोगों को मेडिकल कॉलेज तिलोई भेजा गया। इनमें 10 बच्चे और सात वयस्क शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि सभी मरीजों की स्थिति स्थिर है। गांव में घर-घर दवाएं वितरित करने के साथ लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी दी गई है। फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
मेले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनकी जांच को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यदि खस्ता खाने के बाद इतने लोगों की तबीयत बिगड़ी है, तो खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता की जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। ग्रामीणों में घटना को लेकर आक्रोश है। सवाल यह भी है कि मेले में खाद्य पदार्थों की बिक्री से पहले उनकी गुणवत्ता की जांच की गई थी या नहीं। हालांकि, खस्ता खाने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है, लेकिन बीमारी के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
उन्होंने बताया कि सभी मरीजों की स्थिति स्थिर है। गांव में घर-घर दवाएं वितरित करने के साथ लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी दी गई है। फिलहाल स्थिति सामान्य बताई जा रही है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
मेले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनकी जांच को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यदि खस्ता खाने के बाद इतने लोगों की तबीयत बिगड़ी है, तो खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता की जांच और जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। ग्रामीणों में घटना को लेकर आक्रोश है। सवाल यह भी है कि मेले में खाद्य पदार्थों की बिक्री से पहले उनकी गुणवत्ता की जांच की गई थी या नहीं। हालांकि, खस्ता खाने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई है, लेकिन बीमारी के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की जरूरत महसूस की जा रही है।