समझौते पर कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (ग्लोबल) गौरव मित्तल और एशिया के सेल्स डायरेक्टर डॉ. माइक टरविल ने हस्ताक्षर किए। कंपनी के अनुसार, वह कई वर्षों से इस मिशन के तहत देशभर के किसानों के साथ मिलकर सुगंधित फसलों की खेती को प्रोत्साहित कर रही है। इसके जरिए ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में आजीविका के अवसर बढ़ाने और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
सुगंधित फसलें किसानों के लिए बन सकती हैं आय का विकल्प
सुगंधित पौधों की खेती किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ आय के वैकल्पिक साधन उपलब्ध करा सकती है। मेंथा, लेमनग्रास, सिट्रोनेला और खस जैसी फसलों से आवश्यक तेल प्राप्त किए जाते हैं, जिनका उपयोग सुगंध, सौंदर्य प्रसाधन और अन्य उत्पादों में होता है। हालांकि, ऐसी फसलों की खेती शुरू करने से पहले स्थानीय जलवायु, मिट्टी, प्रसंस्करण की सुविधा और बाजार की मांग का आकलन जरूरी है। किसानों को उपज का उचित मूल्य मिल सके, इसके लिए उत्पादन के साथ खरीद और विपणन की व्यवस्था भी अहम है।एरोमा मिशन के तहत संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग से खेती तथा सुगंध उद्योग की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की संभावना है। इससे किसानों को सुगंधित फसलों की ओर प्रोत्साहित करने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर विकसित करने और आवश्यक तेलों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। बरेली की कंपनी और सीएसआईआर-सीमैप के बीच हुआ समझौता इसी दिशा में एक पहल है।
