मंगलवार को ‘सीएम ग्रिड योजना’ के अंतर्गत शहर की सड़कों को आधुनिक और चौड़ा बनाने की कवायद ने उस समय उग्र रूप ले लिया, जब नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ कोहाड़ापीर पेट्रोल पंप से धर्मकांटा चौराहे तक अतिक्रमण हटाने पहुंची। नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य के नेतृत्व में प्रशासन ने सड़क किनारे बने अवैध निर्माणों और कुछ धार्मिक स्थलों की दीवारों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। इस अचानक हुई कार्रवाई से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते बड़ी संख्या में व्यापारी और स्थानीय निवासी विरोध में सड़कों पर उतर आए। स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए मौके पर मजिस्ट्रेट के साथ भारी पुलिस बल तैनात रहा, जिसके साये में घंटों तक ध्वस्तीकरण का अभियान जारी रहा।
अभियान के दौरान प्रभावित दुकानदारों ने नगर निगम प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। व्यापारियों का तर्क है कि उन्हें अपना सामान हटाने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया और न ही उनके रोजगार को बचाने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई, जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। विरोध और हंगामे के चलते पूरे क्षेत्र में घंटों तनाव की स्थिति बनी रही, लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे प्रदर्शनकारी बेबस नजर आए। दूसरी ओर, नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यातायात को सुगम बनाने और शहर के सौंदर्यीकरण के लिए यह सड़क चौड़ीकरण अनिवार्य है, और सरकारी काम में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा।
