योगी मंत्रिमंडल का बड़ा फैसला : UP में खुलेंगी 900 नई अदालतें, 6,656 पदों पर भर्ती का रास्ता साफ, प्रदेश में 1.20 करोड़ मुकदमे लंबित

# ## Lucknow

लखनऊ, प्रदेश में बढ़ते मुकदमों के बोझ और त्वरित न्याय की जरूरत के बीच योगी सरकार ने न्यायिक व्यवस्था के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंत्रिमंडल ने मंगलवार को प्रदेश के सभी जिलों में 900 नई अदालतों के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इनमें 237 एचजेएस स्तर, 391 सिविल जज (सीनियर डिवीजन) और 272 सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की अदालतें शामिल हैं। नई अदालतों के साथ न्यायिक एवं अन्य संवर्गों के कुल 6656 नए पदों पर भर्ती का रास्ता भी साफ होगा।

संसदीय कार्य एवं वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि नई अदालतों के गठन से सरकार के त्वरित न्याय देने के संकल्प को बल मिलेगा। प्रदेश की अदालतों में इस समय 1 करोड़ 20 लाख 66 हजार 105 मामले लंबित हैं। ऐसे में अदालतों की संख्या बढ़ने से मुकदमों की सुनवाई और निस्तारण की क्षमता में इजाफा होगा।

सरकार ने नई अदालतों के संचालन के लिए हर वर्ष 693.59 करोड़ रुपये की आवश्यकता का आकलन किया है। इसके लिए फिलहाल 8.72 करोड़ रुपये के आवंटन की स्वीकृति दी गई है। अदालतों के गठन के साथ संबंधित न्यायिक और सहायक पदों को भरने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।

9149 अदालतों का है व्यापक प्रस्ताव

प्रदेश में न्यायिक ढांचे के विस्तार का यह फैसला एक बड़े प्रस्ताव का हिस्सा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका में प्रदेश में कुल 9149 नई अदालतों के गठन का मुद्दा सामने आया था। राज्य सरकार की उच्चस्तरीय समिति ने अक्टूबर 2024 में पहले चरण में 900 अदालतों के गठन को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। उस समय प्रस्ताव में 225 एचजेएस, 375 सिविल जज सीनियर डिवीजन और 300 सिविल जज जूनियर डिवीजन अदालतें शामिल थीं।

हाईकोर्ट ने देरी पर जताई थी नाराजगी

मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से लगातार प्रगति की जानकारी मांगी। पिछली सुनवाई में अदालत ने प्रक्रिया में देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव, विधि को तलब किया था। इसके बाद मुख्य सचिव ने अदालत को बताया था कि मुख्यमंत्री स्तर से प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और इसे मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा। अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद शासनादेश जारी करने और अदालतों के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

अदालतों के विस्तार से बढ़ेगी क्षमता
•    कुल नई अदालतें : 900
•    एचजेएस स्तर : 237
•    सिविल जज सीनियर डिवीजन : 391
•    सिविल जज जूनियर डिवीजन : 272
•    लंबित मामले : 1,20,66,105
•    नए पद : 6656
•    सालाना अनुमानित खर्च : 693.59 करोड़ रुपये