विज्ञान भारती का स्थापना दिवस समारोह आयोजित, अवध प्रांत की आधिकारिक वेबसाइट का हुआ लोकार्पण

Lucknow
  • लखनऊ में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और स्वदेशी वैज्ञानिक चिंतन को बढ़ावा देने पर दिया जोर

लखनऊ, 31 अक्टूबर। विज्ञान के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने, समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से विज्ञान भारती का स्थापना दिवस समारोह शनिवार को सीएसआईआर–भारतीय विषविज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर), लखनऊ में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं विज्ञान भारती की प्रार्थना के साथ हुआ। अतिथियों के स्वागत के बाद विज्ञान भारती, अवध प्रांत के महासचिव प्रो. विनय कुमार सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का अभिनंदन किया। पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र संयोजक डॉ. रजनीश चतुर्वेदी ने विज्ञान भारती की स्थापना की पृष्ठभूमि, संगठन के उद्देश्यों और देशभर में वैज्ञानिक चेतना के प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।

  • स्वदेशी वैज्ञानिक चिंतन और वैज्ञानिक चेतना के विस्तार पर जोर

विज्ञान भारती के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री प्रवीण रामदास ने अपने संबोधन में संगठन की राष्ट्रीय दृष्टि, उद्देश्यों तथा समाज में स्वदेशी वैज्ञानिक चिंतन को बढ़ावा देने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने वैज्ञानिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने के महत्व को रेखांकित किया। समारोह की अध्यक्षता विज्ञान भारती, अवध प्रांत के अध्यक्ष प्रो. भृगुनाथ सिंह ने की।

  • अवध विज्ञान भारती की आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण

समारोह का प्रमुख आकर्षण अवध विज्ञान भारती की आधिकारिक वेबसाइट का लोकार्पण रहा। इसके माध्यम से संगठन की गतिविधियों, उपलब्धियों और भावी कार्यक्रमों की जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर व्यापक स्तर तक पहुंचाई जा सकेगी। इसे वैज्ञानिक संवाद को मजबूत बनाने और संगठन की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया गया।

  • वैज्ञानिकों और पदाधिकारियों ने साझा किए विचार

इस अवसर पर सीएसआईआर-आईआईटीआर के वैज्ञानिक-जी डॉ. आर.एस. राय तथा विज्ञान भारती के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अरविंद सी. रानाडे ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. सौरव तोमर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आशीष द्विवेदी ने प्रस्तुत किया। समारोह का समापन कल्याण मंत्र एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।