- उ.प्र. में अनूठी पहल: जनता के द्वार पहुंचने वाले पहले विधायक बने डॉ. राजेश्वर सिंह, ‘आपका विधायक आपके द्वार’ अभियान के 173 कैंप पूरे
लखनऊ। सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने जनप्रतिनिधित्व का ऐसा मॉडल विकसित किया है, जिसमें जनता को विधायक तक नहीं आना पड़ता, बल्कि विधायक स्वयं जनता के बीच पहुंचते हैं। ‘आपका विधायक आपके द्वार’ अभियान के तहत विभिन्न गांवों और वार्डों में नियमित जनसुनवाई शिविर लगाए जा रहे हैं। अब तक इस अभियान के 173 कैंप आयोजित किए जा चुके हैं।
- विधायक बनने के बाद शुरू हुआ अभियान, लगातार जारी
डॉ. राजेश्वर सिंह के विधायक बनने के बाद शुरू हुआ यह अभियान बिना किसी व्यवधान के लगातार जारी है। प्रत्येक शिविर में स्थानीय नागरिकों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनी जाती हैं और संबंधित विभागों के अधिकारियों के माध्यम से उनके समाधान की प्रक्रिया तत्काल शुरू कराई जाती है।
- एक ही मंच पर कई विभाग, मौके पर समाधान की पहल
इन शिविरों में बिजली, पानी, सड़क, नाली, पेंशन, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, राजस्व, स्वास्थ्य, शिक्षा और पुलिस समेत विभिन्न विभागों से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाती है। कई मामलों का निस्तारण मौके पर ही कराया जाता है, जबकि अन्य शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग कर समाधान सुनिश्चित कराया जाता है।
- बुजुर्गों, महिलाओं और ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत
अभियान का सबसे अधिक लाभ उन लोगों को मिल रहा है, जिन्हें सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने में कठिनाई होती है। गांवों और मोहल्लों में शिविर लगने से बुजुर्ग, महिलाएं, दिव्यांग और जरूरतमंद नागरिकों को घर के नजदीक ही अपनी समस्याएं रखने का अवसर मिल रहा है।
- 173वें कैंप ने बनाया नया कीर्तिमान
लगातार 173 जनसुनवाई शिविर आयोजित होना इस अभियान की निरंतरता और जनविश्वास को दर्शाता है। प्रत्येक शिविर में प्राप्त शिकायतों का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है और उनके समाधान की प्रगति की नियमित समीक्षा की जाती है।
- जनप्रतिनिधित्व का नया मॉडल बना ‘आपका विधायक आपके द्वार’
डॉ. राजेश्वर सिंह की यह पहल पारंपरिक जनसंपर्क से आगे बढ़कर सुशासन और जवाबदेही का मॉडल बनती दिखाई दे रही है। यदि उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह दावा सही है, तो डॉ. राजेश्वर सिंह देश के पहले ऐसे विधायक हैं जिन्होंने ‘आपका विधायक आपके द्वार’ जैसे नियमित और व्यवस्थित अभियान के माध्यम से जनता के बीच जाकर समस्याओं के समाधान की स्थायी व्यवस्था विकसित की है।
