भारतीय इतिहास को सकारात्मक सोच से देखने की जरूरत:विहिप

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  • भारतीय इतिहास को सकारात्मक सोच से देखने की जरूरत:अम्बरीष

(www.arya-tv.com)​विश्व हिन्दू परिषद द्वारा लॉकडॉउन कोरोना संक्रमण काल में भी फेसबुक लाइव के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाने के क्रम में विहिप के पूर्व क्षेत्र के संगठन मंत्री ने हजारोें कार्यकर्ताओं को भारतीय इतिहास के तमाम सकारात्मक पहलुओं की जानकारी साझा की। श्री अम्बरीष ने भारतीय इतिहास के बारे में आह्वान किया कि हम सभी भारतीयों को अपने गौरवशाली इतिहास को सकारात्मक सोच से देखने की जरूर है। उन्होंने कहा कि इतिहास किसी भी देश के लिए सबसे महत्वपूर्ण इकाई होती है जिसके हमें अपने पूर्वजों से कुछ सीखने को मिलता है और हम उसी का अनुसरण करके तरक्की के मार्ग पर चलते हैं।

श्री अम्बरीष ने कहा कि अगर किसी भी देश को नष्ट करना है तो उसका इतिहास नष्ट कर दिया जाए तो वह स्वत:ही नष्ट हो जायेगा। हमारे देश का दुर्भाग्य है कि भारत जैसा सोने का चिड़िया कहा जाना वाला देश अंग्रेजों का गुलाम रहा। साथ ही अगर और पहले की बात करें तो विभिन्न प्रकार के विभिन्न धर्म के शासकों ने भारत पर राज किया और अपना परचम लहराया। इसी कड़ी में इन धूर्त लोगों द्वारा हमारे अच्छे इतिहास को हमारे सामने ऐसा पेश किया गया कि हमारे पूर्वज बेकार थे वह किसी योग्य ही नहीं थे। पर अगर सच्चाई की बात करें तो भारत का जो गौरवशाली इतिहास रहा है वह किसी का भी नहीं रहा है। क्योंकि भारत भूमि पर ऐसे ऐसे महान दार्शनिक,महापुरूष आये जिन्होंने भारत का नाम पूरे विश्व में फैलाया और अंग्रेजों की बात करें उन्होंने हमारे इतिहास के साथ छेड़—छाड़ करके ऐसा बना दिया कि हम अपने देश की सच्चई कभी जान ही न पाए। पर वह अपने इस मिशन में कभी सफल नहीं हो पाये क्योंकि प्रत्यक्ष को किसी भी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती है।

हमारे पूर्वजों के जो काम आज तक हमें सीख दे रहे हैं वह अभी भी सबके सामने हैं। दूरशर्तिता की बात करें हमारे पूर्वजों में ऐसे—ऐसे विद्धान रहे कि उन्होंने उस समय ही पृथ्वी का व्यास बता दिया था जो कि हमारा विज्ञान भी इस बात की सच्चाई की पुष्टि कर चुका है। एक तो केवल एक बात है एसी हजारों बातें हमारे सामने आयी हैं जिससे इस बात के प्रमाण मिलते हैं कि हमारे पूर्वजों ने जो किया अच्छा ही किया और हमारे आज भी काम आ रहा है। अंग्रेजी की एक कहानी बताते हुए श्री अम्बरीष ने कहा कि हमारे भारतीय जो विदेश में काम करते थे उनको अंग्रेजों द्वारा कम पैसा ​दिया जाता था उसका पूरा विरोध किया और भारत आकर अपनी कम्पनी बना कर हजारों भारतीयों को काम दिया। इसी तरह हमारे पूर्वजों ने पेड़ों की रक्षा करने के लिए पहले ही पीपल के पेड़ की पूजा शुरू कर दी और कहा कि इस पेड़ की लकड़ी का किसी भी काम में प्रयोग नहीं होगा। ऐसा उनके द्वारा इसलिए किया गया है पीपल के पेड़ में सबसे ज्यादा आक्सीजन होती है अगर वह बचे रहेंगे जो हमारी पृथ्वी सुरक्षित रहेगी। ऐसी ही नीम के पेड़ को सीतला देवी का रूप दिया जिससे कि इस पेड़ का प्रयोग औषधि में किया जा सके। इन सब बातों से सीधा तात्पर्य है कि हमारे पूर्वज बहुत ही समझदार और दूरगामी सोच वाले थे सब उनको सकारात्मक सोच से देखने की जरूरत है।

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