Lucknow: जलभराव-जाम से निपटने की बनेगी योजना, हाईकोर्ट ने बेसमेंट पार्किंग पर भी दिया निर्देश

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लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राजधानी में यातायात व्यवस्था और जलभराव की समस्या को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों से ठोस कार्ययोजना और उसकी प्रगति की जानकारी मांगी है। न्यायालय ने कहा है कि बारिश के दौरान जलभराव के कारण पूरा शहर ठहर जाता है, ऐसे में क्या शहर में जल निकासी की कोई समग्र योजना है? यदि नहीं है तो विशेषज्ञ संस्था से तत्काल योजना तैयार कराई जाए। मामले की अगली सुनवाई पांच अक्टूबर को होगी।

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने उक्त आदेश शहर में यातायात व्यवस्था को लेकर सुराज सिंह बिसेन की ओर से दाखिल एक जनहित याचिका पर पारित किया। न्यायालय को राज्य सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि उसके निर्देश पर गठित समिति प्रत्येक सप्ताह बैठक कर रही है और यातायात के सुचारु संचालन में सामने आ रही कमियों पर विचार कर रही है। नगर निगम ने समिति की सभी सिफारिशों का पालन करने की बात कही।

ई-रिक्शा के रूट पर भी होगा फैसला

कोर्ट ने ई-रिक्शा के संचालन को लेकर पहले दिए निर्देशों की भी जानकारी ली। राज्य सरकार ने बताया कि वह इस संबंध में केंद्र सरकार के जवाब की प्रतीक्षा कर रही है। वहीं कुछ मार्गों पर ई-रिक्शा का संचालन सीमित करने और परमिट जारी करने पर नियंत्रण के उपायों पर विचार किया जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर अगली तारीख तक यह बताने का आश्वासन दिया गया है कि राज्य के अनुरोध पर केंद्र ने क्या कार्रवाई की है।

शहीद पथ-चिनहट मार्ग पर अंडरपास की संभावना

न्यायालय ने कमता तिराहा से पॉलीटेक्निक चौराहा तथा शहीद पथ से आने वाले यातायात को सुगम बनाने के लिए मध्यम और दीर्घकालीन योजनाओं की जानकारी भी मांगी। शहीद पथ से चिनहट की ओर मोड़ पर अंडरपास बनाने की संभावना पर भी विचार करने को कहा गया है। इसमें जमीन की उपलब्धता और यातायात के दबाव को ध्यान में रखकर आख्या अगली सुनवाई पर देने का आदेश दिया है।

बेसमेंट पार्किंग खाली रखने पर सख्ती

न्यायालय ने व्यावसायिक भवनों में बेसमेंट पार्किंग का उपयोग नहीं किए जाने पर भी नाराजगी जताई। बताया गया कि भवनों के नक्शे बेसमेंट में पार्किंग की व्यवस्था के प्रावधान के बाद ही स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन अधिकांश प्रतिष्ठानों में बेसमेंट पार्किंग का इस्तेमाल नहीं हो रहा। इसके बजाय वाहनों को मुख्य सड़क पर खड़ा किया जा रहा है, जिससे यातायात बाधित होता है। न्यायालय ने एलडीए और संबंधित एजेंसियों से पूछा है कि बेसमेंट पार्किंग का अनिवार्य उपयोग कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है। न्यायालय ने यातायात पुलिस, नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के प्रतिनिधियों को अगली सुनवाई में भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।