उत्तर प्रदेश में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूली शिक्षा के स्तर को सुधारने तथा प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब स्कूल शिक्षा से जुड़े तमाम लक्ष्यों, योजनाओं के क्रियान्वयन और अधिकारियों की कार्यशैली का मूल्यांकन तीन माह के विशेष की-परफॉर्मेंस इंडिकेटर (KPI – Key Performance Indicator) के आधार पर किया जाएगा। इस व्यवस्था से न केवल शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार आएगा, बल्कि अधिकारियों और शिक्षकों की जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।
शैक्षणिक गुणवत्ता, उपस्थिति और बुनियादी सुविधाओं का होगा नियमित मूल्यांकन
शासन द्वारा तय किए गए तीन महीने के केपीआई मॉडल के तहत विभिन्न स्तरों पर स्पष्ट मानक तय किए गए हैं। इनमें छात्रों के सीखने की क्षमता (लर्निंग आउटकम), विद्यालयों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, निपुण भारत मिशन के तहत तय लक्ष्यों की प्राप्ति और स्कूलों में बुनियादी अवस्थापना सुविधाओं (ऑपरेशन कायाकल्प) की प्रगति को प्रमुखता से शामिल किया गया है। इसके अलावा डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से दी जाने वाली योजनाओं के समयबद्ध निष्पादन को भी केपीआई का हिस्सा बनाया गया है।
अधिकारियों और निरीक्षकों की तय होगी सीधी जवाबदेही
शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के अनुसार, जिला स्तर से लेकर ब्लॉक स्तर तक तैनात जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS), बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA), खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और जिला समन्वयक की कार्यप्रणाली को इन तीन माह के केपीआई से जोड़ा जाएगा। हर तीन महीने में केपीआई रिपोर्ट का आंकलन किया जाएगा, जिसके आधार पर अधिकारियों की प्रगति रिपोर्ट (ACR) तैयार होगी। जिन जनपदों में केपीआई के मानक कमजोर पाए जाएंगे, वहां के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही तय कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा की मुख्यधारा को मिलेगी गति, डिजिटल मॉनिटरिंग से पारदर्शिता
केपीआई आधारित इस त्रिमासिक मूल्यांकन व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिए डिजिटल विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) और विशेष पोर्टल की मदद ली जा रही है। ऑनलाइन डैशबोर्ड के माध्यम से सभी विद्यालयों और प्रशासनिक अधिकारियों की वास्तविक समय में मॉनिटरिंग की जाएगी। विभाग का मानना है कि हर तीन महीने में लक्ष्य तय कर उनकी समीक्षा करने से योजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली देरी पर लगाम लगेगी और सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे लाखों बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सीधा लाभ मिल सकेगा।
