चीन के नये नक्शे पर भारत में हो रहा विवाद

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(www.atya-tv.com) चीन ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर अपना नया नक्‍शा जारी किया है। चीन के नक्‍शे पर भारत में विवाद हो रहा है। साल 2023 के इस संस्‍करण में चीन ने अरुणाचल प्रदेश, अक्साई चिन क्षेत्र, ताइवान और विवादित दक्षिण चीन सागर पर समेत कई हिस्‍सों पर अपना दावा किया है। चीन के इस नक्‍शे पर विवाद शुरू हो गया है।

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब चीन ने इस तरह से नक्शा जारी कर इन हिस्‍सों पर अपना अधिकार जताया है। वह पहले भी इस तरह से नक्‍शा जारी कर चुका है। हर बार भारत की तरफ से उसके सामने विरोध दर्ज कराया गया है।

चीन का विस्‍तारवादी अभियान

चीन के इस नए नक्‍शे पर कूटनीति मामलों और चीन मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्‍होंने ट्वीट कर लिखा है कि इस तरह की आक्रामकता दर्शाती है कि चीन दुनिया के किसी भी बाकी देश की तुलना में अपने पड़ोसियों के साथ भूमि और समुद्री सीमाओं पर अधिक विवादों में क्यों शामिल है?

उन्‍होंने लिखा कि सन् 1949 में सत्ता हासिल करने के बाद से ही चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी बिना रुके विस्तारवादी अभियान पर है। चेलानी ने बताया है कि चीन के अपने 17 पड़ोसियों के साथ सीमा विवाद हैं। पहले भी चीन की तरफ से इस तरह का नक्‍शा जारी किया जा चुका है। भारत ने बार-बार कहा है कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न अंग है और हमेशा रहेगा।

ब्रिक्‍स में मिले थे मोदी जिनपिंग

चीन के सरकारी समाचारपत्र ग्लोबल टाइम्स ने एक्स (पूर्व में टि्वटर) पर लिखा, ‘चीन के मानक मानचित्र का 2023 संस्करण आधिकारिक तौर पर सोमवार को जारी किया गया। प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय के स्वामित्व वाली मानक मानचित्र सेवा की वेबसाइट पर इसे जारी किया गया। यह मानचित्र चीन और दुनिया के विभिन्न देशों की राष्ट्रीय सीमाओं की रेखांकन विधि के आधार पर संकलित किया गया है।

‘ हैरान करने वाली बात है कि यह घटनाक्रम दक्षिण अफ्रीका के जोहान्‍सबर्ग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग की छोटी मुलाकात के बाद जारी किया गया। 15वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मौके पर पीएम मोदी और जिनपिंग सीमा पर शां‍ति बहाल करने पर रजामंद हुए थे।

तनाव करने पर हुई थी रजामंदी

दोनों नेताओं ने अपने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया था कि सैनिकों को पीछे हटने का आदेश दिया जाए। साथ ही तनाव कम करने के प्रयासों को तेज करने का निर्देश देने पर भी सहमत हुए थे। चीन ने नए नक्‍शे में ताइवान के अलग द्वीप और दक्षिण चीन सागर के एक बड़े हिस्से पर दावा करने वाली नाइन-डैश लाइन पर भी अधिकार जताया है।

चीन, ताइवान को अपनी मुख्य भूमि का हिस्सा होने का दावा करता है। चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग कई बार कह चुके हैं कि वह मिलिट्री के प्रयोग से ताइवान को चीन में मिलाकर रहेंगे। इसके अलावा वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान दक्षिण चीन सागर क्षेत्रों पर भी चीन अपना दावा करता है।