देश के पांच राज्यों में भले ही विधानसभा चुनाव का औपचारिक शंखनाद न हुआ हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। विपक्ष जहां दिल्ली के रामलीला मैदान से सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध का बिगुल बजा रहा है, वहीं भाजपा चुनावी मैदान में उतरकर मतदाताओं को साधने में जुटी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की लगातार जनसभाएं और दौरे इसी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।
देवीपाटन मंडल के बहराइच और बलरामपुर में मुख्यमंत्री की ताबड़तोड़ जनसभाओं के बाद अब सोमवार को उनका गोंडा और अयोध्या दौरा प्रस्तावित है। इन कार्यक्रमों के जरिये विकास परियोजनाओं की सौगात देने के साथ ही संगठन, जनप्रतिनिधियों और संभावित दावेदारों की राजनीतिक सक्रियता भी परखी जाएगी। भाजपा की रणनीति देवीपाटन मंडल की चार जिलों की 20 विधानसभा सीटों के साथ अयोध्या की पांच सीटों पर भी मजबूत पकड़ बनाने की है।
विकास परियोजनाओं के जरिये भाजपा पहले ही बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती की कनेक्टिविटी को मजबूत करने की पहल कर चुकी है। बाराबंकी से बहराइच तक फोरलेन सड़क की सौगात दी जा चुकी है। रेल और सड़क परिवहन के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा तथा पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी योजनाएं आगे बढ़ाई गई हैं। हालांकि गोंडा में सड़क परिवहन सहित कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की मांग अभी बाकी है।
आठ अरब की 98 परियोजनाओं पर रहेगा फोकस
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को गौरा और मनकापुर विधानसभा क्षेत्रों के मध्य स्थित चेतपुर सिंगार घाट मैदान में जनसभा को संबोधित करेंगे। इस दौरान दोनों विधानसभा क्षेत्रों के लिए करीब आठ अरब रुपये की 98 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास प्रस्तावित है। जनसभा के मंच से विकास कार्यों की उपलब्धियां गिनाने के साथ ही नई घोषणाओं की भी उम्मीद जताई जा रही है।
गोंडा की भौगोलिक स्थिति अयोध्या के निकट होने के बावजूद जिले को अयोध्या से जोड़ने वाली फोरलेन सड़क और शहर की करीब तीन लाख आबादी की पेयजल जरूरतों जैसे मुद्दे अहम बने हुए हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के दौरे से इन मांगों को लेकर भी लोगों की उम्मीदें जुड़ी हैं। जनसभा के बाद मुख्यमंत्री का अयोध्या में भी कार्यक्रम प्रस्तावित है।
विपक्ष की तैयारी में नेतृत्व का इंतजार
एक तरफ भाजपा मैदान में उतरकर चुनावी गतिविधियों को गति दे रही है, वहीं विपक्षी दलों की तैयारियां फिलहाल संगठन और स्थानीय कार्यकर्ताओं तक सीमित नजर आ रही हैं। कांग्रेस के स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ता सक्रिय हैं, लेकिन बड़े नेताओं की सक्रियता का इंतजार बना हुआ है। कांग्रेस प्रवक्ता शिवकुमार दूबे का कहना है कि पार्टी हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। अब बड़े नेताओं के आने का इंतजार है।
हालांकि कांग्रेस के बड़े नेता दिल्ली के रामलीला मैदान से विरोध का बिगुल बजा रहे हैं। समाजवादी पार्टी भी दिल्ली के राजनीतिक घटनाक्रम के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर अपनी चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में फिलहाल राजनीतिक तस्वीर में भाजपा की सक्रियता और विपक्ष की रणनीति के बीच मुकाबला साफ दिखाई देने लगा है।
