मंत्री ने कहा कि गौशालाओं में हरे चारे, भूसे, बिजली और पानी की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। गोवंश के संरक्षण में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। गौशालाओं की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाने और बाउंड्री की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि गौशालाओं में दूध देने वाली गायों को रखने के साथ ही पशुओं की नस्ल सुधार और कृत्रिम गर्भाधान पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि दुग्ध उत्पादन बढ़ाया जा सके।
गौशालाओं में बनेंगे गौकाष्ठ और वर्मी कम्पोस्ट
धर्मपाल सिंह ने गौशालाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए वर्मी कम्पोस्ट, गौकाष्ठ और गौदीप जैसे उत्पाद तैयार कराने के निर्देश दिए। इन गतिविधियों से गौशालाओं की आय बढ़ाने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं। उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों को भी इन कामों से जोड़ने पर जोर दिया, ताकि महिलाओं को आजीविका के नए अवसर मिल सकें।
पराग की मिठाइयों की गुणवत्ता पर भी जोर
बैठक में गौशालाओं के संचालन के लिए राज्य वित्त आयोग से नियमित धनराशि उपलब्ध कराने के संबंध में समन्वय करने को कहा गया। इसके अलावा दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और किसानों को इसका लाभ दिलाने पर जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि देश में दुग्ध उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। दीपावली पर पराग की ओर से उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और स्वादिष्ट मिठाइयां उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। बैठक में अपर निदेशक, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, पराग के महाप्रबंधक और पशु चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहे।
