जिले के तिलहर क्षेत्र में जीएसटी विभाग ने लोहे के कारोबार से जुड़े मामले में जांच का दायरा बढ़ा दिया है। शुक्रवार को अधिकारियों ने सरिया लेकर जा रहे एक वाहन की जांच की। विभाग के मुताबिक, मौके पर वाहन से संबंधित बिल और जरूरी कागजात उपलब्ध नहीं कराए जा सके। पड़ताल के दौरान एक गोदाम के पंजीकरण और वहां रखे सामान के दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठे हैं।
मुख्यालय की सूचना पर पहुंची संयुक्त टीम
डिप्टी कमिश्नर अनिरुद्ध सिंह के अनुसार, विभागीय मुख्यालय को क्षेत्र में बिना आवश्यक बिलों के सरिये का कारोबार किए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद शाहजहांपुर और बरेली के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने जांच शुरू की। कार्रवाई के दौरान वैभव अग्रवाल की रामासरे फर्म से जुड़े वाहन की पड़ताल की गई। अधिकारियों का कहना है कि वाहन के जरूरी कागजात नहीं दिखाए जाने के बाद मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।
दो घंटे तक चली दस्तावेजों की पड़ताल
शुक्रवार दोपहर लगभग तीन बजे शुरू हुई कार्रवाई शाम पांच बजे तक चली। इस दौरान टीम ने वाहन से जुड़े कारोबारी रिकॉर्ड की जानकारी जुटाने की कोशिश की। विभाग को टैक्स संबंधी अनियमितताओं की शिकायत भी मिली है, जिसकी पुष्टि के लिए दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
जांच के दौरान टीम को एक गोदाम के बारे में जानकारी मिली, जिसके पंजीकरण की स्थिति स्पष्ट नहीं बताई गई। अधिकारी वहां रखे माल का विवरण और उससे जुड़े कारोबारी अभिलेख देखना चाहते हैं। लेकिन संबंधित व्यापारी के मौके पर नहीं मिलने के कारण जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में कठिनाई आई।
संपर्क नहीं हुआ तो आगे बढ़ सकती है कार्रवाई
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, व्यापारी से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया। उसने कुछ समय बाद पहुंचने की बात कही, लेकिन वह जांच के दौरान उपस्थित नहीं हुआ। अधिकारियों ने बताया कि मकान और गोदाम पर ताला लगा था तथा व्यापारी के मोबाइल नंबर बंद मिल रहे थे।
सर्च वारंट के तहत जांच जारी
डिप्टी कमिश्नर अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि टीम के पास 15 दिन का सर्च वारंट है। उनके मुताबिक, जांच में सहयोग नहीं मिलने की स्थिति में गोदाम, वहां मौजूद माल और संबंधित वाहन को सील करने की कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल विभाग का ध्यान कारोबार से जुड़े दस्तावेजों की जांच और मामले के तथ्यों का पता लगाने पर है।
