यूपी से महाराष्ट्र तक…बुवाई के बीच नकली बीज का खेल, कैसे हो रही धांधली?

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देश में इस साल अल नीनो के प्रभाव के चलते 60 प्रतिशत कम बारिश होगी. इसकी मार किसानों को झेलनी पड़ सकती है. फसलों पर बुरा असर पड़ सकता है. लेकिन अलनीनो जैसी प्राकृतिक स्थितियों के आने और बुवाई करते ही किसानों की फसल चौपट हो जाए तो इसका दोष किसे जाएगा. महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ के तकरीबन 18 जिलों में सोयाबीन की बीजों की बुवाई के 20 से 25 दिनों बाद भी उससे पौधे अंकुरित नहीं हुए. ये स्थितियां नकली बीजों के चलते पैदा हुईं.

यहांअब तक पांच हजार से अधिक किसान पुलिस, कृषि विभाग और प्रशासन के पास शिकायत दर्ज करा चुके हैं. सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं और कई बीज कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है. पांच सदस्यीय तहसील स्तरीय शिकायत निवारण समिति को भी सरकार ने भंग कर दिया है. हालांकि, नकली बीजों के गिरोहों से परेशान होने वाला महाराष्ट्र इकलौता राज्य नहीं है.उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान और तेलंगाना समेत कई राज्यों में नकली और घटिया गुणवत्ता वाले बीजों की बिक्री के मामले सामने आए हैं.

यूपी, एमपी, राजस्थान, गुजरात, तेलंगाना से भी आए नकली बीज के मामले

उत्तर प्रदेश के झांसी और इटावा समेत कई जिलों में कुछ हफ्तों पहले नकली मूंगफली बीजों के बेचने के मामले में कईयों पर कार्रवाई हुई थी. फिलहाल, उत्तर प्रदेश सरकार ने नकली बीजों के सिंडिकेट को खत्म करने के लिए साथी पोर्टल को लॉन्च किया है. इस ऐप में बीज उत्पादन से लेकर वितरण तक की प्रक्रिया ट्रैक की जाएगी. इसके चलते नकली बीजों को किसानों तक पहुंचाने की गुंजाइश कम हो जाएगीमध्य प्रदेश में नकली और घटिया बीज का मुद्दा अक्सर किसानों की बर्बादी का कारण बनता है. कुछ दिनों पहले सागर और जबलपुर जैसे क्षेत्रों में प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा गैर-मानक बीजों की अवैध री-पैकिंग और बिक्री करने वाले गोदामों पर छापे मारे गए थे. इसके अलावा राजस्थान के अंदर भी एसीबी ने जून महीने में मूंगफली के 15 करोड़ के घटिया बीज की जब्ती की थी. वहीं, तेलंगाना में भी बड़ी मात्रा में नकली कपास के बीज पकड़े गए थे.

  • नामी कंपनियों की पैकिंग की नकल- धोखाधड़ी करने वाले लोग, बड़ी बीज कंपनियों जैसी पैकिंग और लोगो तैयार कर लेते हैं. किसान इससे भ्रमित हो जाते हैं.
  • बिना प्रमाणित बीज की बिक्री- कुछ व्यापारी बिना किसी सरकारी प्रमाणन वाले बीजों को हाइब्रिड या उच्च उत्पादन वाला बताकर बेचते हैं.
  • पुराने या एक्सपायर बीज की री-पैकिंग- कुछ जालसाज बचे हुए या एक्सपायर बीजों को नए पैकेट में भरकर दोबारा बाजार में उतार देते हैं.
  • मिलावट- असली बीज में सस्ते या कम गुणवत्ता वाले बीज मिलाकर वजन बढ़ा दिया जाता है. किसान इससे भ्रमित हो जाते हैं.
  • फर्जी लाइसेंस और अवैध विक्रेता- कई जगह बिना लाइसेंस वाले दुकानदार या अस्थायी विक्रेता गांव-गांव जाकर बीज बेचते हैं.

किसानों को कितना और कैसे नुकसान होता है?

नकली बीज केवल पैसों का नुकसान नहीं करता, बल्कि पूरी खेती प्रभावित कर देता है. कई स्थितियों में बीज अंकुरित नहीं होते हैं. पौधे कमजोर निकलते हैं. उत्पादन में भारी गिरावट आती है. किसान को दोबारा बुवाई करनी पड़ती है. इस बीच उन पर कर्ज बढ़ जाता है, जिससे किसानों पर भारी आर्थिक संकट आ जाता है. धान, सोयाबीन, कपास, बाजरा, मूंगफली, सब्जियों के हाइब्रिड बीजों के सबसे द्यादा नकली होने की आशंका रहती है.

महाराष्ट्र में रिकॉर्ड स्तर पर घटिया और नकली बीजों के मामले बढ़े

2023-24 के नकली और घटिया क्वालिटी के 3,630 मामले सामने आए थे. फिर 2024-25 में 32,525 मामले सामने आए यानी एक साल में ऐसे में केसेज में 9 गुना वृद्धि. सबसे ज्यादा उछाल महाराष्ट्र में आया. यहां 2023-24 में शून्य केसेज थे. वहीं, 2024-25 में 1,438 मामले सामने आए.

नकली बीज बेचने वालों पर निगरानी और कार्रवाई कैसे होती है?

देश में बीजों की गुणवत्ता की निगरानी कई संस्थाएं करती हैं. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, राज्य कृषि विभाग, राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसियां, सीड टेस्टिंग लैब्रोटरीज, बीज निरीक्षक जैसी समय-समय पर बाजार से सैंपल लेकर सीड्स की जांच करती हैं.

इन बीजों के नियमन के लिए सीड्स एक्ट 1966, सीड्स रुल्स 1968, सीड्स एक्ट 1983 और इसेंशिएल कमोडिटी एक्ट के तहत बीजों के नियमन और फेक सीड्स विक्रेताओं पर कार्रवाई की जाती है. अगर जांच के दौरान कोई व्यापारी गलत ब्रांडिंग, फर्जी लेबलिंग या गुणवत्ता में धोखाधड़ी करते हुए पाया जाता है, उसका लाइसेंस रद्द हो सकता है. उसे जेल भी जाना पड़ सकता है. उसपर भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

किसान बीज खरीदते समय क्या सावधानी रखें?

फेक सीड्स् को बेचने वाले गिरोहों से बचना है तो किसान केवल लाइसेंसधारी विक्रेता से बीज खरीदें. हमेशा पक्का बिल लें. पैकेट पर बैच नंबर और लॉट नंबर देखें. सर्टिफिकेशन टैग जरूर जांच लें. अंकुरण प्रतिशत, एक्सपायरी या पैकिंग की तारीख भी देखें. पैकेट खोलने से पहले उसकी फोटो लें. इसके अलावा पैकेट और बिल जरूर संभालकर रखें, ताकि शिकायत की स्थिति में इसका इस्तेमाल किया जा सके.

अगर किसानों को लगता है, उन्हें जो बीज मुहैया कराया गया है वह नकली है, तो तुरंत जिला कृषि अधिकारी को सूचना दें. संबंधित कृषि विभाग में शिकायत दर्ज कराएं. खेत का निरीक्षण कराने का अनुरोध करें. फिर भी उनकी सुनवाई नहीं होती है तो उपभोक्ता आयोग या अदालत का सहारा लिया जा सकता है.

शिकायत मिलने पर कृषि विभाग क्या करता है?

फैक सीड्स की शिकायत मिलने पर कृषि विभाग बीज के नमूने जब्त करता है. लैब में बीजों की क्वालिटी टेस्ट कराता है. दोषी पाए जाने पर व्यापारी का लाइसेंस निलंबित किया जाता है. फिर, कृषि विभाग के जरिए किसानों को मुआवजे और वैकल्पिक बुवाई के लिए राज्य सरकारें अलग-अलग योजनाओं के तहत सहायता भी देती हैं.

नकली बीजों का कारोबार कृषि अर्थव्यवस्था पर भारी चोट

नकली बीज का कारोबार केवल देश की खाद्य सुरक्षा और कृषि अर्थव्यवस्था को बड़ी चोट पहुंचाता है. एक खराब बीज किसानों के पूरी सीजन की मेहनत, लागत और उम्मीदों पर पानी फेर सकता है. साथ ही किसानों के जीवनयापन के लिए गंभीर संकट खड़ा कर सकता है. यही वजह है कि नकली बीजों की पहचान के लिए कई राज्य सरकारें समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चलाती हैं.