इकौना (श्रावस्ती), अमृत विचार। घर में बेटी का जन्म हो तो खुशियां मनाना, छठी और बरही की रस्म निभाना आम बात होती है, लेकिन श्रावस्ती के इकौना क्षेत्र में एक परिवार ने यही खुशी अपनी गाय की बछिया के जन्म पर मनाई। बछिया को बेटी का दर्जा दिया गया, उसकी छठी के बाद बरही कराई गई और करीब 250 लोगों को भोज भी कराया गया। इतना ही नहीं, खुशी के इस मौके पर डीजे बजा और परिवार के लोग उसकी धुन पर झूमते नजर आए।
यह मामला आस्था है, पशु के प्रति गहरा लगाव है या फिर सोशल मीडिया के दौर में किसी अनोखी कहानी को चर्चा में लाने की चाह, इसे लेकर तरह-तरह की बातें हो सकती हैं, लेकिन नग्गू के परिवार के लिए यह आयोजन भावनाओं से जुड़ा हुआ है।
12 दिन पहले घर आई ‘बेटी’
इकौना क्षेत्र के कोरीपुरवा महजिदिया गांव निवासी नग्गू पुत्र गुदनू की गाय ने करीब 12 दिन पहले एक बछिया को जन्म दिया। बछिया के जन्म के बाद परिवार में खुशी का माहौल बन गया। नग्गू ने उसे परिवार की बेटी की तरह माना और तय किया कि जिस तरह बेटी के जन्म पर छठी और बरही की रस्म निभाई जाती है, उसी तरह बछिया के जन्म पर भी आयोजन किया जाएगा।
इसके बाद परिवार ने बछिया की छठी पूरी की और बरही के मौके पर ग्रामीणों व रिश्तेदारों को भोज के लिए आमंत्रित किया।
250 लोगों ने किया भोज, डीजे पर झूमे लोग
बरही के मौके पर घर में बड़े स्तर पर भोजन की व्यवस्था की गई। नग्गू के मुताबिक, करीब 250 लोगों ने भोज में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में डीजे भी बजाया गया और परिवार के लोग खुशी में झूमते नजर आए।
बड़ी संख्या में ग्रामीणों और रिश्तेदारों के पहुंचने से घर ही नहीं, बल्कि आसपास का माहौल भी उत्सव जैसा हो गया। दिनभर गांव में इसी आयोजन की चर्चा होती रही।
तीन बेटे हैं, बेटी नहीं
नग्गू बताते हैं कि उनके तीन बेटे हैं, लेकिन बेटी नहीं है। ऐसे में बछिया के जन्म को उन्होंने बेटी के जन्म की तरह ही खुशी का अवसर माना। इसी भावना के साथ उन्होंने उसकी छठी और बरही की रस्म आयोजित की।
उनके लिए बछिया महज एक पशु नहीं, बल्कि परिवार का हिस्सा बन चुकी है।
तीन साल पहले भी मनाई थी बछिया की बरही
खास बात यह है कि बछिया की बरही मनाने का यह परिवार का पहला अनुभव नहीं है। नग्गू के अनुसार, करीब तीन साल पहले वह बलरामपुर जिले के राजापुर भरिया स्थित एक ईंट-भट्ठे पर काम करते थे। उस दौरान भी उनकी गाय ने एक बछिया को जन्म दिया था।
तब भी नग्गू ने बछिया को बेटी मानकर बरही का आयोजन किया था।
अब आसपास के गांवों में भी चर्चा
इस बार हुए आयोजन में करीब 250 लोगों के शामिल होने और डीजे पर परिवार के लोगों के खुशी मनाने की तस्वीरें और चर्चा आसपास के गांवों तक पहुंच गईं। लोग इस आयोजन को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं।
किसी के लिए यह पशु के प्रति भावनात्मक लगाव की मिसाल है, तो कोई इसे बदलते दौर में खुशी जाहिर करने का अनोखा तरीका मान सकता है। वजह चाहे जो हो, नग्गू के परिवार का यह आयोजन फिलहाल आसपास के क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
