मुजफ्फरपुर: भोजपुर जिले में हुए एनकाउंटर के मामले की बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। जिले के मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता एस. के. झा ने भोजपुर एनकाउंटर मामले में मानवाधिकार आयोग में याचिका दर्ज की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए आयोग ने बिहार के मुख्य सचिव, डीजीपी और भोजपुर के एसपी को तलब किया है और चार सप्ताह में रिपोर्ट की मांग की है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनंत मनोहर बदर द्वारा 13 जुलाई 2026 को मामले की समीक्षा की जाएगी।
मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान
मानवाधिकार अधिवक्ता एस. के. झा द्वारा इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली और बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग, पटना में दो अलग-अलग याचिका दायर की गयी थी। उन्होंने अपनी याचिका में मांग की है कि इस एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करते हुए रिटायर्ड जज की निगरानी में इस पूरे मामले की जांच कराई जाये और दोषियों पर सख्त-से-सख्त कार्रवाई की जाएं। उनके द्वारा पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की भी मांग की गई है। अधिवक्ता झा ने आयोग के इस कदम को सराहनीय बताते हुए कहा कि बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग, मानवाधिकारों के प्रति काफी सजग है। फिलहाल इस पुरे मामले पर मानवाधिकार आयोग अपनी पैनी नजर रखे हुए है।
कई पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई
बता दें कि भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के रहने वाले भरत भूषण तिवारी की मौत पुलिस एनकाउंटर में हो गई। भोजपुर के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में ADG सुधांशु कुमार ने कहा, “एनकाउंटर से पहले 16 जून को पुलिस वाले उससे (भरत भूषण तिवारी) बात करने गए वो उसे ठीक से हैंडल नहीं कर पाए। इस मामले में लापरवाही पर हमने एक SHO, 2 SI, एक ASI और एक कॉन्स्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है।” भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता अश्विनी चौबे ने भी बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने इस मामले पर कहा, “भरत तिवारी एक बेगुनाह व्यक्ति थे जिन्होंने पिछड़े वर्गों के लिए लड़ाई लड़ी; उनकी हत्या एक साजिश थी, और पुलिस समेत इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर इस घिनौने कृत्य के लिए कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”
