अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में हंगामा जारी है। SIT इस मामले की जांच कर रही है। सोमवार को SIT को अपनी प्राइमरी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी थी लेकिन नहीं सौंपी गई। पता लगा है कि SIT ने अब तक जिन लोगों के बयान दर्ज किए हैं, जो सबूत इकट्ठे किए हैं, उनको कंपाइल करने में वक्त लग रहा है। इसके कारण आज रिपोर्ट सरकार को नहीं सौंपी जा सकी। इन सब के बीच ये बात भी सामने आ गई है कि राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी का खुलासा कैसे हुआ और ये चोरी कैसे पकड़ी गई है। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से।
कैसे हुआ चोरी का खुलासा?
बात चार मई की है। यात्री सुविधा केन्द्र के बेसमेंट में जहां काउंटिंग होती है, वहां काउंटिंग खत्म होने के बाद साफ-सफाई का काम चल रहा था। सफाई कर्मचारी को काउंटिंग सेंटर में बने टॉयेलेट से एक बैग मिला। इस थैले में सिक्के भरे थे। कर्मचारी ने तुरंत इसकी जानकारी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय को दी। इसके बाद चंपत राय ने अपने स्तर पर तुरंत जांच की। जो लोग उस दिन काउंटिग में थे उनमें से छह लोगों पर शक की सुई टिक गई।
घरों में रेड के बाद पकड़ा गया कैश
चंपत राय ने लोकल पुलिस की मदद से आगे की तफ्तीश की। इन छह लोगों के घरों में रेड की गई। जिस शख्श के घर में सबसे पहले रेड हुई उसके यहां 80 लाख का कैश बरामद हुआ। इसके बाद दूसरे व्यक्ति के घर में पुलिस पहुंची। यहां कैश तो नहीं मिला लेकिन इस शख्स ने बताया कि वो हर महीने अपनी वाइफ के नाम पर बैंक में दो लाख रूपए जमा कराता है। ये पैसे चढ़ावे में चोरी से आता है। इस आरोपी ने अकाउंट से सारा पैसा निकलवा कर ट्रस्ट के हवाले कर दिया। फिर तीसरे संदिग्ध से पूछताछ हुई, उसने बताया कि उसके पास भी पचास लाख हैं। सारी रकम चढ़ावे में चोरी की है। उसने भी सारा पैसा वापस कर दिया। इस तरह ट्रस्ट ने डेढ़ करोड़ रूपए से ज्यादा की रकम बरामद कर ली।
लोकल लोगों की लगाई गई थी ड्यूटी
चूंकि छोटे-छोटे लोगों से बड़ी रकम मिली इसलिए ये आशंका बढ़ गई कि इस खेल में और भी लोग शामिल होंगे। काउंटिग पर निगरानी रखने के लिए SBI ने जिन लोगों की ड्यूटी लगाई थी, वो सारे के सारे लोकल लोग थे, ट्रस्ट के लोगों के जान पहचान वाले थे। इन्हें ट्रस्ट के लोगों की सिफारिश पर ही रखा गया था। ट्रस्ट के फाइनेंशियल मैटर्स को अनिल मिश्रा ही डील करते हैं। चढ़ावे की गिनती से लेकर बैंक में जमा करने तक और ट्रस्ट के खर्चों का सारा हिसाब किताब अनिल मिश्रा ही देख रहे थे। इसलिए अनिल मिश्रा की भूमिका की भी जांच हो रही है।
