- गांवों के बच्चों को महानगरों जैसी आधुनिक शिक्षा देने की पहल
लखनऊ। सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल पर क्षेत्र के अनेक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, कंप्यूटर सुविधा और आधुनिक शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीण और सामान्य परिवारों के बच्चों को भी महानगरों की तरह आधुनिक एवं तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराना है। शिक्षा के क्षेत्र में यह प्रयास अब सरोजनीनगर में एक बड़ी डिजिटल क्रांति का रूप लेता दिखाई दे रहा है।
- कई विद्यालयों में स्थापित हुई स्मार्ट क्लास
डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा सरोजनीनगर क्षेत्र के कई विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित कराई गई हैं। समाचार रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने दस विद्यालयों में स्मार्ट क्लास शुरू कराई तथा 25 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी के लिए 250 से अधिक कंप्यूटर उपलब्ध कराए।
उनका लक्ष्य सरोजनीनगर के प्रत्येक विद्यालय को डिजिटल शिक्षा से जोड़ना है ताकि कोई भी बच्चा आधुनिक शिक्षा से वंचित न रहे।
- बच्चों को मिल रहा तकनीक आधारित शिक्षण
स्मार्ट क्लास के माध्यम से अब बच्चे केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल स्क्रीन, वीडियो, प्रोजेक्टर और चित्रों के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं। विज्ञान, गणित, भूगोल और अंग्रेजी जैसे विषय अब बच्चों को अधिक सरल और रोचक लगने लगे हैं। शिक्षकों का कहना है कि डिजिटल माध्यम से पढ़ाई होने के कारण बच्चों की समझने की क्षमता और कक्षा में सहभागिता दोनों बढ़ी हैं।
- ग्रामीण क्षेत्रों में भी डिजिटल शिक्षा की अलख
डॉ. राजेश्वर सिंह ने केवल शहरी क्षेत्र ही नहीं बल्कि दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में भी स्मार्ट क्लास की शुरुआत कराई है। एक रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने पीलीभीत टाइगर रिजर्व क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय हुसैन नगर में भी स्मार्ट क्लास का उद्घाटन किया, जो उनकी डिजिटल शिक्षा मुहिम की 33वीं स्मार्ट क्लास थी।
उन्होंने कहा था कि स्मार्ट क्लास केवल एक डिजिटल स्क्रीन नहीं, बल्कि बच्चों की कल्पनाशक्ति और सोच को नई दिशा देने का माध्यम है।
- डिजिटल शिक्षा के साथ कौशल विकास पर भी जोर
डॉ. राजेश्वर सिंह ने शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए डिजिटल एजुकेशन एंड यूथ एम्पावरमेंट सेंटर भी स्थापित किए हैं। इन केंद्रों में कंप्यूटर प्रशिक्षण, वीडियो एडिटिंग, ग्राफिक डिजाइनिंग, टैली, साइबर सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उनका उद्देश्य युवाओं को नौकरी खोजने वाला नहीं बल्कि रोजगार सृजन करने वाला बनाना है।
- एआई शिक्षा लागू करने का भी दिया प्रस्ताव
डॉ. राजेश्वर सिंह ने आधुनिक समय की जरूरत को समझते हुए विद्यालय स्तर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई शिक्षा लागू करने का प्रस्ताव भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा। उन्होंने कहा कि भविष्य की दुनिया तकनीक आधारित होगी और बच्चों को अभी से डिजिटल एवं एआई शिक्षा से जोड़ना आवश्यक है।
- शिक्षा के क्षेत्र में बन रहा मॉडल विधानसभा क्षेत्र
सरोजनीनगर में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, रोबोटिक्स लैब, प्लेनेटेरियम और आधुनिक शिक्षण संसाधनों की उपलब्धता ने क्षेत्र को शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल शिक्षा बच्चों की रचनात्मक क्षमता, आत्मविश्वास और सीखने की गति को बढ़ाती है। यही कारण है कि डॉ. राजेश्वर सिंह की पहल को अभिभावक, शिक्षक और विद्यार्थी सभी सराह रहे हैं।
- शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता
डॉ. राजेश्वर सिंह का कहना है कि शिक्षा ही समाज और राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है। यदि बच्चों को आधुनिक संसाधन और सही मार्गदर्शन मिले तो वे देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सरोजनीनगर के और अधिक विद्यालयों को स्मार्ट क्लास और डिजिटल संसाधनों से जोड़ा जाएगा। सरोजनीनगर में चल रही यह डिजिटल शिक्षा मुहिम अब केवल एक योजना नहीं, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन की नई कहानी बन चुकी है।
