- राधे श्याम चौहान ने तैराकी में बनाई पहचान, वर्षों से सिखा रहे तैराकी का हुनर
- राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर दिखाया प्रतिभा का दम
- कुशीनगर की परंपरा से मिली तैराकी की प्रेरणा
- हजारों लोगों को सिखाई तैराकी की कला
- राकेश शर्मा की पैनी नजरों से सुरक्षित रहती है तैराकों की हर सांस
लखनऊ। तैराकी केवल एक खेल नहीं, बल्कि जीवन रक्षक कला भी मानी जाती है और इसी कला को वर्षों से लोगों तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं अनुभवी तैराक राधे श्याम चौहान। देवरिया के मूल निवासी राधे श्याम चौहान वर्ष 1994 से लेकर वर्ष 2026 तक लगातार तैराकी के क्षेत्र में सक्रिय रहकर अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। लगभग 22 वर्षों से वह तैराकी के क्षेत्र में अपने अनुभव और मेहनत के दम पर लोगों को प्रशिक्षित कर रहे हैं। तैराकी के क्षेत्र में उनके योगदान और प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह राज्य स्तर और राष्ट्रीय स्तर की तैराकी प्रतियोगिताओं में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं तथा अपने प्रदर्शन से क्षेत्र और प्रदेश का नाम रोशन किया है।
- कुशीनगर की परंपरा से मिली तैराकी की प्रेरणा
राधे श्याम चौहान ने तैराकी की शुरुआत अपनी बुआ के घर कुशीनगर में की थी। जिस स्थान पर उन्होंने यह कला सीखी, वहां पिछले करीब 50 वर्षों से तैराकी की परंपरा चली आ रही है। कुशीनगर स्थित रधिया देवरिया गांव में छोटे-बड़े लगभग सभी लोग तैराकी में निपुण हैं और गांव में यह परंपरा एक विशेष पहचान रखती है। इसी माहौल ने राधे श्याम चौहान को एक कुशल तैराक बनने की प्रेरणा दी और आगे चलकर उन्होंने इसे अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना लिया।
- हजारों लोगों को सिखाई तैराकी की कला
राधे श्याम चौहान ने केवल स्वयं तैराकी में सफलता हासिल नहीं की, बल्कि हजारों लोगों को भी इस कला का प्रशिक्षण दिया है। उनके शिष्यों में 5 वर्ष के छोटे बच्चों से लेकर 90 वर्ष तक के बुजुर्ग भी शामिल हैं। वर्तमान समय में वह आशियाना स्थित चांसलर क्लब के स्विमिंग पूल में सभी आयु वर्ग के लोगों को तैराकी सिखा रहे हैं। पारिवारिक जीवन में भी वह एक जिम्मेदार व्यक्ति हैं। वह विवाहित हैं और तीन बच्चों के पिता हैं। वर्षों के अनुभव और समर्पण के साथ वह आज भी तैराकी के माध्यम से लोगों में आत्मविश्वास और सुरक्षा का भाव विकसित कर रहे हैं।
- राकेश शर्मा की पैनी नजरों से सुरक्षित रहती है तैराकों की हर सांस
लखनऊ। चांसलर क्लब में वर्ष 1994 से स्विमिंग पूल ऑपरेटर के रूप में कार्यरत राकेश शर्मा अपनी सजगता और अनुभव के कारण तैराकों के बीच विशेष पहचान रखते हैं। वह राधे श्याम चौहान के साथ लंबे समय से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं और तैराकी सीखने आने वाले लोगों पर लगातार पैनी नजर बनाए रखते हैं। खासकर नए तैराकों की गतिविधियों पर उनकी विशेष निगाह रहती है। यदि कोई तैराक पानी में असहज होता है या डूबने जैसी स्थिति बनती है, तो राकेश शर्मा तुरंत उसे पहचानकर सतर्क कर देते हैं। उनकी तत्परता और अनुभव के चलते स्विमिंग पूल में आने वाले लोग खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं।
