सरकारी तंत्र की लापरवाही का नतीजा: corona का विस्फोटक ब्लास्ट

Lucknow
Vishal Saxena

(www.arya-tv.com)पिछले वर्ष की तरह इस बार भी आर्य मीडिया नेटवर्क के मंच में विशेष संवाददाता विशाल सक्सेना ने कोरोना के संबंध में कई महत्वपूर्ण आकड़े पेश किये हैं जो यह बता रहे हैं कि देश में बढ़ते कोरोना के मामले जो इतने ज्यादा बढ़ गये हैं इसके क्या कारण रहे हैं जाने इस विशेष लेख में….

एक बड़ी जिम्मेदारी, लापरवाही और कमियां…

आज बात होगी कुछ ऐसे फैक्ट्स पर जिसे पढ़ कर आप की आंखे खुली की खुली रह जायेगी, आइए आपको रूबरू कराते है आइने से :

चिराग तले अंधेरा इस कहावत को सच साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई।

  • आज बात करते है उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार, जो अपने आप में सब करने में सक्षम थी, पर किया कुछ भी नही, इतनी बड़ी लापरवाही की उम्मीद नहीं थी। एक साल का समय था कोरोना से निबटने के लिए पर हाथ पर हाथ रख बैठे रहे और अफसोस इस बात का, जो करना चाहिए आज भी नहीं कर रहे है।
  • एक साल पहले भी पता था, अगर कोरॉना फिगर 1% भी क्रॉस कर गई तो सारी मेडिकल व्यवस्था ध्वस्त हो जायेगी, तब भी कोई कंक्रीट प्लान नहीं बनाया गया, और पॉलिसी ऐसी जिससे कुछ पूंजीपतियों को ही फायदा मिल पाए, आइए आपको आइना दिखाते है जो फैक्ट्स पर आधारित है:
  • 2019-2020: 4502 metric ton oxygen का निर्यात
  • 2020–2021: 9300 metric ton oxygen का निर्यात

कहां गई दूरदरर्शिता, क्यों सिर्फ पैसा कमाने के लिए ध्यान नहीं दिया गया। भारत बहुत बड़ा उत्पादक है ऑक्सीजन का तो फिर निर्यात को दुगुना करने की क्या जरूरत थी, क्या इतना भी अंदाजा नहीं था की हमको ऑक्सीजन की जरूरत पड़ सकती है, जबकि ब्राजील इटली स्पेन के हाल हम रोज पढ़ रहे है और यह भी जान रहे है corona के दूसरा फेज ने कैसे दूसरे देशों में कोहराम मचाया हुआ है।

क्यों वैक्सीन के निर्यात को रोका नहीं गया 20% वैक्सीन का निर्यात हर महीने हो रहा था जिसमे अप्रैल 21 में रोक लगी, क्यों निर्यात से पहले अपने देश के नागरिकों को वैक्सीन नहीं लगाई गई, क्यों रूस से वैक्सीन का ऑर्डर अप्रैल 21 में किया गया पहले क्यों नहीं, अगर वैक्सीन होती तो corona को रोका जा सकता था। क्यों देश के नौजवानों को वैक्सीन से दूर रखा गया और आज भी देश का नौजवान वैक्सीन के लिए दर दर भटक रहा है और वैक्सीन के नाम पर सिर्फ प्लान और आश्वासन ही दिया जा रहा है, जबकि हमारे शीर्ष नेता हमेशा कहते है की हमारे देश की नौजवान हमारे देश की ताकत है और आज उन्ही नौजवानों को corona की आग में झोंका जा रहा है और आज के नौजवान सिर्फ मजाक बन कर रह गए है जो पहले अपने घर वालो मां- बाप को बचाए और फिर अपने बीवी बच्चो को और फिर अगर बच गए तो अपने आप को वो भी बिना सपोर्ट सिस्टम के। अगर corona हुआ तो ना तो वैक्सीन लगी, ना बेड मिला, ना ऑक्सीजन, और जैसे तैसे कुछ मिला भी तो 50000 से 100000 रुपए का रोज का खर्चा।

और सरकारों से सिर्फ कमियों का हवाला और आगे का आश्वासन ही मिल रहा है और कुछ नहीं, problem यह नहीं है की हम कुछ कर नही सकते, प्रोब्लम यह है की हम कर सकते थे पर किए नहीं। और काम सिर्फ वही हुए जिससे मोटा फायदा मिल सकता था और अफसोस की बात यह है की सरकारें आज भी कुछ नहीं कर रहीं। उदारहरणर्थ:

अपने देश के कॉपी राइट्स संविधान में साफ साफ लिखा हुआ है की किसी भी वैश्विक बीमारी और एमरजेंसी में केंद्र सरकार किसी भी मेडिसिन और विशेष वस्तु के कॉपी राइट्स को खत्म कर सकती है। तो फिर वैक्सीन पर से कॉपी राइट्स हाटा कर भारत में अन्य फार्मा कंपनी को प्रोडक्शन के लिए फॉर्मूला शेयर किया जाए तो वैक्सीन का प्रोडक्शन कम से कम 10 गुना तक बढ़ाया जा सकता है। आज लगभग 3000 फार्मा कंपनी प्रोडक्शन करती है भारत में अगर 10% कंपनियों के साथ वैक्सीन के प्रोडक्शन शुरू किया जाए तो एक महीने में ही वैक्सीन का संकट खत्म हो जायेगा पर नहीं ऐसा करने से करोड़ों की कमाई बंद हो जायेगी। जनता मरती है तो मरे, एक न एक दिन तो सबको जाना है कुछ ऐसी ही सोच हो गई है सत्ता के गलियारों में घूमने वालो की।

आज लगता है कि इंसानियत अपने निचले स्तर पर आ गई है और संवेदनशीलता सिर्फ बातों में ही है और सोच और कर्मों में नहीं।

जहां चुनाव होते है तो corona नहीं होता और लोगो को झोंक दिया जाता है अपने फायदे और छवि के लिए।

आप सभी से मेरा अनुरोध है की संकट के समय में आप जिसकी जितनी भी मदद कर पाए उतनी जरूर करे, क्यों की कोई अगर आपको फोन करता है तो बहुत उम्मीदों से करता है, तो उम्मीद कायम रखे क्योंकि आज के दौर में जिंदगी उम्मीदों पर ही टिकी है और अगर आप मदद नहीं भी कर पा रहे हो तो सीधे माना ना करे उनको हौसला दे और सही राह दिखाए।

विशाल सक्सेना विशेष संवाददाता
(मो.8707322419)

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