कभी कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों के कारण निवेशकों की प्राथमिकता से दूर रहने वाला उत्तर प्रदेश अब देश की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते 9 वर्षों में प्रदेश ने निवेश, औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे और रोजगार सृजन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे 1.10 करोड़ रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है।
प्रदेश में आयोजित चार ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) के माध्यम से 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं। इनसे करीब 60 लाख रोजगार अवसर सृजित हुए हैं। वहीं 7.5 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं के साथ 5वीं जीबीसी की तैयारी चल रही है। सरकार का दावा है कि निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल और बेहतर कानून-व्यवस्था ने प्रदेश को उद्योग जगत का पसंदीदा गंतव्य बनाया है।
एक्सप्रेसवे नेटवर्क ने खोले विकास के नए द्वार
उप्र. आज देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल है। वर्तमान में नौ एक्सप्रेस-वे संचालित हैं, जबकि तीन निर्माणाधीन और 10 प्रस्तावित हैं। प्रदेश में विकसित हो रहे एक्सप्रेसवे देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा हैं। इनके किनारे औद्योगिक क्लस्टर और नए औद्योगिक शहर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे निवेश और रोजगार को नई गति मिली है।
हवाई, सड़क और जलमार्ग से मजबूत हुई कनेक्टिविटी
वर्ष 2017 में जहां प्रदेश में सीमित हवाई सेवाएं थीं, वहीं अब 17 हवाई अड्डे संचालित हो रहे हैं और सात अन्य विकसित किए जा रहे हैं। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के शुरू होने के बाद यूपी पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा। पूर्वी और पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तथा राष्ट्रीय जलमार्गों के विस्तार ने भी औद्योगिक गतिविधियों को नई ताकत दी है।
एफडीआई, निर्यात और फैक्ट्रियों में कई गुना बढ़ोतरी
प्रदेश में अप्रैल 2017 से जून 2025 के बीच 17,004 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त हुआ, जो पूर्व अवधि की तुलना में पांच गुना से अधिक है। फैक्ट्रीज एक्ट के तहत पंजीकृत इकाइयों की संख्या 14,169 से बढ़कर 31,459 हो गई है। वहीं प्रदेश का निर्यात 86 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेवा क्षेत्र में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
एमएसएमई और ओडीओपी से गांवों तक पहुंचा विकास
एमएसएमई क्षेत्र आज प्रदेश में 3.11 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना ने स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। हजारों उद्यमियों और कारीगरों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
रक्षा गलियारा, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर बने नई पहचान
उत्तर प्रदेश अब हाई-टेक उद्योगों का भी केंद्र बन रहा है। रक्षा औद्योगिक गलियारे के छह नोड्स पर तेजी से कार्य हो रहा है। यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित की जा रही है। वहीं 30 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से डेटा सेंटर पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जिससे प्रदेश डिजिटल अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
वैश्विक मंच पर बढ़ी उत्तर प्रदेश की साख
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रदेश को बड़े निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। जापान, सिंगापुर और अन्य देशों के निवेशकों ने उत्तर प्रदेश में रुचि दिखाई है। सरकार का दावा है कि निवेश, आधारभूत ढांचे और रोजगार के मोर्चे पर मिली सफलता प्रदेश को वर्ष 2029 तक एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ा रही है।
