- “नीति-निर्माण की प्रक्रिया में भागीदारी से ही व्यापक जनकल्याण संभव” — डॉ. राजेश्वर सिंह
- साढ़े चार वर्षों में जनसमस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न विभागों को 20,000 से अधिक पत्र प्रेषित किए गए
- महिला सशक्तिकरण, कानून-व्यवस्था, शिक्षा, कौशल विकास और खेल अवसंरचना को बताया जनसेवा की प्राथमिकता
लखनऊ। होटल ताज महल, लखनऊ में FICCI FLO लखनऊ द्वारा आयोजित विशेष संवाद सत्र “From Policing to Politics, Power to People: Dr Rajeshwar Singh, MLA” में डॉ. राजेश्वर सिंह ने प्रतिष्ठित पत्रकार एवं लेखिका शैली चोपड़ा के साथ खुले संवाद में सहभागिता की। कार्यक्रम की मेज़बानी FICCI FLO लखनऊ की अध्यक्ष सिमरन साहनी एवं कार्यकारिणी समिति द्वारा की गई। संवाद के दौरान डॉ. राजेश्वर सिंह ने पुलिस सेवा से राजनीतिक जीवन तक की अपनी यात्रा, प्रशासनिक अनुभव तथा जनसेवा के प्रति अपने संकल्प पर विस्तार से विचार साझा किए।
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि राजनीति समाज के सबसे चुनौतीपूर्ण एवं उत्तरदायित्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक है, जहाँ जनप्रतिनिधि के लिए जनता और संगठन, दोनों के प्रति पूर्ण समर्पण आवश्यक है। उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधि का दिन प्रातः छह बजे से शुरू होकर निरंतर जनसमस्याओं के समाधान के प्रयासों में व्यतीत होता है। पुलिस सेवा और राजनीति के अंतर को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा में दायित्व मुख्यतः नियमों के अनुपालन और कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक केंद्रित रहता है, जबकि जनप्रतिनिधि के रूप में प्रत्येक नागरिक की समस्या को सुनना और उसके समाधान का प्रयास करना वास्तविक उत्तरदायित्व है।
- महिला सशक्तिकरण को आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर जोर
महिलाओं को समाज की केंद्रीय एवं निर्णायक शक्ति बताते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि महिलाएँ अब केवल सरकारी योजनाओं की लाभार्थी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर और सशक्त भागीदार बनना चाहती हैं। उन्होंने बताया कि जनसंपर्क के दौरान अनेक महिलाओं ने रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग रखी। इसी क्रम में मुख्य सचिव कार्यालय से प्राप्त सिलाई मशीनों सहित 2,000 से अधिक सिलाई मशीनें विभिन्न केंद्रों में वितरित कराई गई हैं।
- स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक शक्ति को बढ़ावा
वर्ष 2011 में प्रारंभ हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का उल्लेख करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि विगत 15 वर्षों में इस योजना के अंतर्गत महिलाओं को देशभर में 12 लाख करोड़ रुपये के ऋण प्रदान किए गए हैं तथा लगभग 9 करोड़ स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं। महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वहाँ महिलाओं को 50 हजार करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया, जिसकी वापसी में शून्य NPA रहा। उन्होंने इसे महिलाओं की आर्थिक जिम्मेदारी और विश्वसनीयता का प्रमाण बताया।
- कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को बताया प्रगति का आधार
प्रदेश में कानून-व्यवस्था के परिणामों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया कि वर्तमान सरकार से पूर्व उत्तर प्रदेश में प्रति पाँच वर्ष में लगभग 25,000 हत्याएँ दर्ज होती थीं। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में अब तक गैंगस्टर एक्ट के अंतर्गत 70,000 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत 1,000 अपराधियों को निरुद्ध किया गया तथा 300 से अधिक कुख्यात अपराधी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए। उन्होंने बताया कि 4 अरब डॉलर से अधिक की परिसंपत्तियाँ कुर्क की गई हैं।
- शिक्षा, डिजिटल सशक्तिकरण और खेलों को बढ़ावा
सरोजनीनगर विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा और बालिका सशक्तिकरण से जुड़ी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया कि क्षेत्र के 50 बालिका विद्यालयों, इंटर कॉलेजों एवं डिग्री कॉलेजों में स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था की गई है।
- बदलते तकनीकी युग में reskilling और upskilling पर जोर
कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुझाव साझा करते हुए डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि तेजी से बदलते तकनीकी परिवेश में युवाओं को रोजगार की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना आवश्यक है। इसी दृष्टि से नियमित विश्वविद्यालयों के साथ-साथ reskilling और upskilling पर केंद्रित विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी को पत्र प्रेषित किया गया है।
- “नीति-निर्माण में भागीदारी से व्यापक जनकल्याण संभव”
संवाद के समापन पर डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि पुलिस सेवा में 20–22 वर्षों का अनुभव उन्हें अनुशासन, संवेदनशीलता और प्रशासनिक दृष्टिकोण सिखाता रहा, लेकिन राजनीति में आने के बाद उनके दृष्टिकोण का विस्तार हुआ। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति अपने व्यावसायिक क्षेत्र के शिखर पर पहुँच जाता है, तब भी नीति-निर्माण की प्रक्रिया में सहभागी बनकर व्यापक स्तर पर जनकल्याण में योगदान दिया जा सकता है।
