Jauhar University पहुंचीं डॉ. तंजीन फातिमा, आरडीए की कार्रवाई पर विवि प्रशासन के साथ की बैठक, आसिम राजा ने लगाया यह आरोप

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रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को अवैध घोषित कर ध्वस्तीकरण के आदेश जारी होने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। गुरुवार को आजम खान की पत्नी और पूर्व सांसद डॉ. तंजीन फातिमा जौहर विश्वविद्यालय पहुंचीं, जहां उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन और पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर आगे की कानूनी रणनीति पर मंथन किया।

ध्वस्तीकरण आदेश के बाद विश्वविद्यालय पहुंचीं डॉ. तंजीन फातिमा

रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) द्वारा विश्वविद्यालय के 40 में से 38 भवनों को अवैध घोषित कर ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए जाने के बाद डॉ. तंजीन फातिमा ने विश्वविद्यालय परिसर में अधिकारियों और सपा नेताओं के साथ बैठक की। बैठक में आरडीए की कार्रवाई को अदालत में चुनौती देने और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।बैठक के दौरान डॉ. तंजीन फातिमा के कहने पर विश्वविद्यालय परिसर में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को परिसर से बाहर भेजा गया।

सपा का आरोप- जल्दबाजी में लिया गया फैसला

जेल रोड स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में नगराध्यक्ष आसिम राजा ने कहा कि आरडीए का फैसला जल्दबाजी में लिया गया। उनका दावा था कि अदालत की ओर से 15 दिन का समय दिया गया था, लेकिन उसका पालन नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आदेश जारी होते ही विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस कैंप स्थापित कर दिया गया, जो पूरी तरह अनुचित है।

‘हमारी बात सुनी गई, लेकिन फैसला पहले से तय था’ : आसिम राजा

आसिम राजा ने कहा कि 15 जुलाई को जारी नोटिस का जवाब विश्वविद्यालय प्रबंधन ने समय पर दे दिया था। जिला प्रशासन ने मौखिक पक्ष रखने के लिए भी बुलाया, जहां विश्वविद्यालय का पक्ष रखा गया। उनका आरोप है कि सुनवाई के महज 10 मिनट के भीतर फैसला सुना दिया गया और तुरंत आदेश जारी कर दिया गया, जिससे यह कार्रवाई पूर्व नियोजित प्रतीत होती है।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी

सपा नेताओं ने कहा कि उन्हें हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार है और प्रशासन को इस कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए। आसिम राजा का दावा है कि विश्वविद्यालय की सभी इमारतों के स्वीकृत नक्शे मौजूद हैं और यदि जिला प्रशासन उन्हें स्वीकार नहीं कर रहा है तो ये दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जौहर विश्वविद्यालय के मुख्य गेट का मामला पहले से अदालत में विचाराधीन है और उस पर स्टे लागू है। ऐसे में उससे संबंधित किसी भी कार्रवाई को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

छात्रों की सुविधा के लिए प्रशासन ने लगाया कैंप

वहीं जिला प्रशासन ने विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए परिसर में कैंप स्थापित कर जिला स्तरीय अधिकारियों की तैनाती की है।