इस साल टूटेगा गर्मी का रिकॉर्ड, उत्तर भारत में सामान्य से ज्यादा दिन चलेगी हीटवेव, IMD प्रमुख ने बताया किन राज्यों में रहेगा बुरा हाल

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दिल्ली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि इस साल सिंधु-गंगा के मैदानी इलाकों के उत्तरी हिस्से, पूर्वी तटीय राज्यों, पश्चिमी राज्यों गुजरात और महाराष्ट्र तथा उनसे लगे क्षेत्रों में सामान्य से अधिक दिनों तक ऊष्ण लहर चलने की आशंका है। आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जहां मौसम की दृष्टि से हर साल अत्यधिक गर्मी पड़ने की आशंका बनी रहती है। इन इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने की संभावना है, ऐसा उन क्षेत्रों में भी हो सकता है जहां शायद ऊष्ण लहर नहीं चलती है।

उन्होंने कहा, ”कुछ इलाके मौसम की दृष्टि से संवेदनशील हैं। उदाहरण के लिए महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में साल के इस समय सामान्य तापमान 41 से 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है। इसी तरह उत्तर प्रदेश और हरियाणा में मई आने तक सामान्य तापमान 40 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।” महापात्रा ने कहा, ”इसलिए हमें अधिक तापमान वाले ऐसे दिनों के लिए तैयार रहना चाहिए।”

जिन लोगों के मौसम की चरम परिस्थितियों से सर्वाधिक प्रभावित होने का खतरा है, उनकी मदद के लिए आईएमडी की ओर से उठाए जा रहे कदमों के बारे में पूछे जाने पर महापात्रा ने कहा कि विभाग ने रेहड़ी-पटरी वालों और खेतों में काम करने वाले मजदूरों समेत खुले में रहने वाले लोगों तक जानकारी पहुंचाने के लिए ‘व्हाट्सएप’ समूह बनाए हैं। इसके अलावा सूचना पट भी लगाए गए हैं, जिन पर गर्मी की स्थिति और उससे बचाव के लिए किए जा सकने वाले उपायों की जानकारी दी जाती है।

उन्होंने कहा, ”हमारा उद्देश्य हर व्यक्ति तक पहुंचना और मौसम संबंधी आईएमडी के पूर्वानुमान की जानकारी उपलब्ध कराना है। हम सरकार के माध्यमों से भी जानकारी देते हैं। इनमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) का साझा चेतावनी प्रोटोकॉल (कॉमन अलर्ट प्रोटोकॉल) भी शामिल है, जिससे मोबाइल फोन रखने वाला कोई भी व्यक्ति यह जानकारी प्राप्त कर सकता है।”

महापात्रा ने कहा कि कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं, जहां लोगों के पास मोबाइल फोन नहीं होते या उन्हें आईएमडी की चेतावनी तुरंत नहीं मिल पाती। उन्होंने कहा कि गर्मी से प्रभावित हो सकने वाले ऐसे लोगों तक नयी या पारंपरिक विधियों से पहुंचने की अब भी गुंजाइश है। उन्होंने सोमवार को ‘ग्लोबल हीट एंड कूलिंग फोरम’ में अपने संबोधन का एक उदाहरण देते हुए कहा, ”पिछले साल दिल्ली में रिक्शा चालकों, रेहड़ी-पटरी वालों और घरेलू कामगारों के संगठनों ने हमसे संपर्क किया था और जानकारी दिए जाने का अनुरोध किया था। हमने उनके संगठन के सचिवों को ‘व्हाट्सएप’ के जरिये सूचना दी, जिन्होंने फिर अपने सदस्यों तक यह जानकारी पहुंचाई।