कामकाजी बच्चों को बाल श्रम से अलग कर शिक्षा से जोड़ना है : मुख्यमंत्री

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  • मुख्यमंत्री ने ‘बाल श्रमिक विद्या योजना’ का शुभारम्भ किया
  • योजना का उद्देश्य कामकाजी बच्चों को बाल श्रम से अलग कर शिक्षा से जोड़ना: मुख्यमंत्री
  • हर बच्चे को उसकी प्रतिभा के अनुरूप उन्नति के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार संकल्पित
  • मुख्यमंत्री ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद आजमगढ़, गोण्डा, बलरामपुर, कानपुर, लखनऊ तथा सोनभद्र के लाभार्थियों से संवाद किया
  • इस योजना के माध्यम से बालक को प्रतिमाह 1,000 रु0 तथा बालिकाओं को 1,200 रु0 दिए जाने का प्राविधान
  • कक्षा 08, 09 व 10 उत्तीर्ण करने पर प्रतिवर्ष 6,000 रु0 की अतिरिक्त प्रोत्साहन धनराशि दिए जाने की व्यवस्था
  • प्रथम चरण में इस योजना से 57 जिलों के 2,000 परिवारों के कामकाजी बच्चे लाभान्वित
  • श्रमिक इस समाज का अत्यन्त स्वाभिमानी वर्ग, जिसने अपने श्रम से समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला रखी: मुख्यमंत्री
  • उनके जीवन में बेहतरी लाने का प्रयास करना शासन की जिम्मेदारी है
  • बाल श्रम न केवल बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है, बल्कि इससे समाज व राष्ट्र की भी अपूरणीय क्षति होती
  • सभी मण्डलों में अटल आवासीय विद्यालय की स्थापना की कार्यवाही की जा रही
  • उत्तर प्रदेश, देश का ऐसा एक मात्र राज्य है, जो कामकाजी बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु ‘बाल श्रमिक विद्या योजना’ लागू कर रहा

(www.arya-tv.com)उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सरकारी आवास पर अन्तर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर प्रदेश में पारिवारिक विषम परिस्थितियों के कारण बाल श्रम कर रहे कामकाजी बच्चों व उनके परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराये जाने के लिए ‘बाल श्रमिक विद्या योजना’ का शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा कि यह एक कण्डीशनल कैश ट्रांसफर योजना है। इसका उद्देश्य कामकाजी बच्चों को बाल श्रम से अलग कर शिक्षा से जोड़ना है। उत्तर प्रदेश, देश का ऐसा एक मात्र राज्य, जो कामकाजी बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने हेतु इस प्रकार की योजना लागू कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तव में श्रमिक इस समाज का अत्यन्त स्वाभिमानी वर्ग है, जिसने अपने श्रम से समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला रखी। उन्हें एक नया जीवन देना, उनके जीवन में बेहतरी लाने का प्रयास करना शासन की जिम्मेदारी है। शासन की सभी योजनाओं के माध्यम से इन सभी परिवारों के जीवन में खुशहाली लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना के माध्यम से निःशुल्क रसोई गैस कनेक्शन हो या उजाला योजना के माध्यम से विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की कार्यवाही, ऐसे विभिन्न प्रयासों से जब सभी लोग मिलकर आगे बढ़ते हैं, तो हम इन्हें स्वावलम्बन की ओर अग्रसर करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ बच्चे ऐसे हैं, जो मजबूरी में बाल श्रम करते हैं। बच्चे जब बचपन में ही अपने पारिवारिक खर्चे के लिए मजदूरी करने को मजबूर होते हैं, तो इससे न केवल बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, बल्कि इससे समाज व राष्ट्र की भी अपूरणीय क्षति होती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हर बच्चे को उसकी प्रतिभा के अनुरूप उन्नति के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार संकल्पित है। प्रदेश के श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों, उनके बच्चों व परिवार के अन्य सदस्यों के लिए जिस प्रकार की अभिनव योजनाएं संचालित की गई हैं, वह अत्यन्त सराहनीय है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी मण्डलों में अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किये जाने की कार्यवाही राज्य सरकार द्वारा की जा रही है। निर्माण श्रमिकों के बच्चे, अनाथ बच्चे या जिनके माता-पिता दिव्यांग अथवा किसी असाध्य बीमारी से ग्रसित हैं और उनके पास रोजी-रोटी का कोई दूसरा विकल्प नहीं है, परिवार भूमिहीन है उन्हें भी अटल आवासीय विद्यालय में प्रवेश हेतु पात्रता श्रेणी में रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल आवासीय विद्यालय 12 से 15 एकड़ के क्षेत्रफल में स्थापित किये जाएंगे। इन विद्यालयों में विद्यार्थियों को अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त शिक्षा दी जाएगी। जिन बच्चों की रुचि खेल में होगी, उन्हें स्पोट्र्स की गतिविधियों से जोड़ने का कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार, अगर किसी विद्यार्थी को कोई हुनर आता है, तो उसे स्किल डेवलेपमेंट के अन्तर्गत इस संस्थान में सुविधाएं दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि अटल आवासीय विद्यालयों में रहने-खाने और सभी प्रकार की आवश्यक सुविधाएं सरकार द्वारा मुहैया करायी जाएंगी।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सरकार की प्राथमिक चिन्ता में वे परिवार हैं, जो विषम परिस्थितियों में अपने बच्चों से कार्य करा रहे हैं। कुछ बच्चे ऐसे परिवार के भी हैं जिनके परिवार में माता या पिता अथवा दोनों की मृत्यु हो चुकी हो, माता या पिता अथवा दोनों स्थायी रूप से दिव्यांग हों, माता या पिता अथवा दोनों किसी गम्भीर असाध्य रोग से ग्रसित हों, ऐसे परिवार जहां महिला या माता परिवार की मुखिया हो, भूमिहीन परिवार है।मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे परिवारों को उनके बच्चों की शिक्षा को निरन्तर रखने के लिए बाल श्रमिक विद्या योजना के अन्तर्गत बाल श्रम से अलग कर शिक्षा से जोड़ा जाना है। इस योजना के माध्यम से बालक को प्रतिमाह 1,000 रुपये तथा बालिकाओं को 1,200 रुपये दिए जाने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, ऐसे बच्चों द्वारा कक्षा 08, 09 व 10 उत्तीर्ण करने पर प्रतिवर्ष 6,000 रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन धनराशि दिए जाने की भी व्यवस्था है।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इस प्रकार की योजना पूर्व में भी संचालित की गयी थी, परन्तु पात्रता की कठिन शर्ताें तथा लाभ की धनराशि कम होने के कारण इसमें पर्याप्त संख्या में लाभार्थी उपलब्ध नहीं हो सके। जबकि कुल लाभार्थियों की संख्या मात्र 260 थी तथा यह सिर्फ प्रदेश के 10 जिलों में ही लागू थी।मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना वर्तमान सरकार द्वारा संशोधित कर प्रथम चरण में प्रदेश के 13 मण्डलों के 57 जिलों के कामकाजी बच्चों के 2,000 परिवारों को लाभ दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, इन्हें अन्य सरकारी योजनाओं का भी लाभ दिलाये जाने की व्यवस्था की गयी है। इस योजना का विकेन्द्रीकरण करते हुए लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया अत्यन्त सरल रखी गयी है। इसमें विद्यालय प्रबन्ध समिति व स्थानीय निकाय के प्रतिनिधियों को भी यह अधिकार दिया गया है कि वह ऐसे कामकाजी बच्चों के सम्बन्ध में जानकारी मिलने पर प्रस्तावित योजना में उनके आच्छादन की संस्तुति कर सकते हैं। इस योजना के अन्तर्गत दी गयी व्यवस्था के अनुरूप श्रम विभाग के अधिकारियों द्वारा आवश्यक जांच कर योजना में लाभान्वित किया जायेगा।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जनपद आजमगढ़, गोण्डा, बलरामपुर, कानपुर, लखनऊ तथा सोनभद्र के लाभार्थियों से संवाद किया।

कार्यक्रम में श्रम एवं सेवायोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के कुशल मार्गदर्शन में श्रम विभाग द्वारा उल्लेखनीय कार्य किये गये हैं। उन्होंने कहा कि ‘बाल श्रमिक विद्या योजना’ के माध्यम से बाल श्रम को हतोत्साहित करने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर मुख्य सचिव आर0के0 तिवारी, औद्योगिक विकास आयुक्त आलोक टण्डन, अपर मुख्य सचिव सूचना एवं गृह अवनीश कुमार अवस्थी, प्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन सुरेश चन्द्रा, सूचना निदेशक शिशिर, यूनीसेफ की प्रमुख सुश्री रूथ लियानो सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।