बिजनौर बीच गांव की सड़क बनी मुसीबत, जलभराव और गड्ढों से त्रस्त लोग

Lucknow
  • महीनों से बदहाल सड़क, आवागमन हुआ कठिन

लखनऊ। सरोजिनी नगर विधानसभा क्षेत्र के बिजली पासी वार्ड द्वितीय स्थित बिजनौर बीच गांव की सड़क बदहाली की मिसाल बन गई है। सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे और लंबे समय से जमा पानी के कारण स्थानीय लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर पैदल चलना तक जोखिम भरा हो गया है और हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।

  • शिकायतों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

क्षेत्रवासियों के अनुसार सड़क की समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की गई। समाचार माध्यमों के जरिए भी मामला उठाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका। जलभराव के कारण गड्ढों की गहराई दिखाई नहीं देती, जिससे दोपहिया वाहन चालक और रिक्शा चालक अक्सर हादसों का शिकार होते-होते बचते हैं। बुधवार को बांस से लदी एक ट्रॉली भी गड्ढे में असंतुलित होकर पलटने से बाल-बाल बच गई।

  • नाला निर्माण का हवाला, लेकिन समस्या बरकरार

स्थानीय लोगों का कहना है कि पार्षद प्रतिनिधि लवकुश रावत को भी समस्या से अवगत कराया गया था। उस समय बताया गया था कि क्षेत्र में नाला निर्माण कार्य चल रहा है, जिसके कारण जलभराव की स्थिति बनी हुई है और कार्य पूरा होने के बाद समस्या दूर हो जाएगी। लेकिन करीब एक माह बीतने के बावजूद सड़क पर पानी भरा हुआ है और हालात पहले से अधिक खराब होते जा रहे हैं।

  • विकास के दावों पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि वार्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले परिवार की नगर निगम में मजबूत पकड़ होने के बावजूद क्षेत्र की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। लोगों का आरोप है कि विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

  • तत्काल समाधान की मांग

क्षेत्रवासियों ने महापौर, नगर निगम प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि बिजनौर बीच गांव में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था कराई जाए तथा क्षतिग्रस्त सड़क का तत्काल पुनर्निर्माण कराया जाए। लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

  • जनता का सवाल

“जब सड़क पर महीनों से जलभराव है, गड्ढों में वाहन फंस रहे हैं और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है, तो नगर निगम, वार्ड प्रतिनिधियों और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही आखिर कब तय होगी?”