नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने दीपावली के लिए पटाखों का कारोबार करने वाले दो कारोबारियों को राहत देते हुए पुलिस द्वारा जब्त पटाखों को तत्काल रिहा करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने पुलिस द्वारा जब्त किए गए पटाखों को तत्काल रिहा करने के आदेश दिए हैं। न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने इस मामले में निचली अदालतों के फैसलों को निरस्त करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि जब्त पटाखों को अनिश्चितकाल तक पुलिस हिरासत में रखना उचित नहीं है, खासकर तब जब ये सामान त्योहार से जुड़े मौसमी कारोबार का हिस्सा हों और देरी से कारोबारियों को आर्थिक नुकसान हो सकता हो।
बिक्री की अनुमति से दो दिन पहले जब्त हुए थे पटाखे
मामले के अनुसार याचिकाकर्ता विकास यादव और एक अन्य व्यक्ति दीपावली के अवसर पर पटाखे बेचने का कारोबार करते हैं। उन्होंने त्योहार के दौरान बिक्री के लिए पटाखे खरीदकर एक गोदाम में रखे थे। 16 अक्टूबर, 2025 को ऊधम सिंह नगर जिले की काशीपुर कोतवाली पुलिस ने गोदाम से पटाखे जब्त कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया था। कारोबारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता टीए खान ने हाईकोर्ट में दलील दी कि उन्हें 18 से 20 अक्टूबर 2025 तक पटाखे बेचने की अनुमति मिली थी। पुलिस ने 16 अक्टूबर को ही पटाखे जब्त कर लिए, यानी बिक्री की अनुमति की अवधि शुरू होने से दो दिन पहले। उनका कहना था कि पटाखे त्योहार पर बिक्री के लिए गोदाम में रखे गए थे, न कि आवासीय परिसर से अवैध बिक्री शुरू करने के लिए।
निचली अदालतों से नहीं मिली राहत
दीपावली के लिए पटाखों का कारोबार करने वाले दो व्यापारियों को उत्तराखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने जब्त पटाखों को छुड़ाने के लिए काशीपुर के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में आवेदन दिया लेकिन 18 अक्टूबर, 2025 को आवेदन खारिज कर दिया गया। इसके बाद सत्र न्यायालय में दायर पुनरीक्षण याचिका भी 17 सितंबर, 2026 को खारिज हो गई। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय का रुख किया। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता टीए खान ने अदालत को बताया कि उन्हें 18 से 20 अक्टूबर 2025 तक पटाखे बेचने की अनुमति मिली थी।
पुलिस ने 16 अक्टूबर को, 2025 यानी बिक्री की अनुमति की अवधि शुरू होने से दो दिन पहले ही पटाखे जब्त कर लिए थे। उनका तर्क था कि पटाखे गोदाम में त्योहार के लिए रखे गए थे और आवासीय परिसर से अवैध बिक्री शुरू करने का मामला नहीं था।
त्योहार बीतने पर घट सकता है पटाखों का व्यावसायिक मूल्य
अदालत ने पाया कि जब्त पटाखों की सूची, विवरण और संख्या का रिकॉर्ड पुलिस के पास उपलब्ध है। ऐसे में पटाखों को लगातार पुलिस हिरासत में रखने का कोई उपयोगी उद्देश्य नजर नहीं आता। अदालत ने यह भी कहा कि पटाखों के भंडारण, कब्जे और बिक्री से जुड़े सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन जरूरी है।
हालांकि, मौजूदा मामले की परिस्थितियों में केवल जब्ती के आधार पर पटाखों को अनिश्चितकाल तक पुलिस हिरासत में रखना उचित नहीं है। पटाखे मौसमी कारोबार से जुड़े सामान हैं और त्योहार बीतने के बाद उनका व्यावसायिक मूल्य काफी कम हो सकता है, जिससे कारोबारियों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने 18 अक्टूबर, 2025 और 17 सितंबर 2026 के आदेशों को निरस्त कर दिया। अदालत ने यह आदेश 28 अक्टूबर, बुधवार को को पारित किया लेकिन आदेश की प्रति आज उपलब्ध हुई।
