थाना क्षेत्र के राजपुर मिलक गांव में करीब दो माह से ग्रामीणों के लिए परेशानी और दहशत का कारण बने तेंदुए को आखिरकार वन विभाग ने पिंजरे में कैद कर लिया। सोमवार को जंगल में लगाए गए पिंजरे में किसी समय तेंदुआ फंस गया। रात करीब साढ़े आठ बजे बाल्मीकि बस्ती के आसपास तेंदुए के गुर्राने और दहाड़ने की आवाजें सुनाई दीं। करीब आधे घंटे तक लगातार आवाजें आने के बाद ग्रामीणों को पिंजरे में तेंदुए के फंसने का अंदेशा हुआ। सूचना फैलते ही गांव में हलचल मच गई।
लाठी-डंडे लेकर पिंजरे तक पहुंचे ग्रामीण
बाल्मीकि बस्ती निवासी इंदू वाल्मीकि और बाबूराम वाल्मीकि ने तेंदुए जैसी आवाज सुनाई देने की जानकारी ग्राम प्रधान अशोक कुमार और सहदेव सिंह यादव को दी। ग्रामीणों को शक हुआ कि कहीं तेंदुआ वन विभाग के लगाए पिंजरे में कैद तो नहीं हो गया।
इसके बाद कल्याण सिंह, मास्टर विक्रम सिंह, श्यामलाल, बाबू सिंह, राजवीर, विमल कुमार और कमल सिंह समेत एक दर्जन से अधिक ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर पिंजरे की ओर पहुंच गए।
पिंजरे के पास पहुंचने पर ग्रामीणों ने अंदर तेंदुए को कैद पाया। पिंजरे में बंद तेंदुआ लगातार गुर्रा रहा था। उसकी आवाज सुनकर मौके पर मौजूद ग्रामीण भी सहम गए। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
रात साढ़े दस बजे पहुंची वन विभाग की टीम
पुलिस से सूचना मिलने के बाद रात करीब साढ़े दस बजे वन विभाग के वन दरोगा एमपी सिंह, पीयूष जोशी और मदन कुमार टीम के साथ मौके पर पहुंचे।
तेंदुआ पकड़े जाने की खबर आसपास के गांवों में फैलते ही बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंच गए। भीड़ बढ़ने से वन विभाग की टीम को तेंदुए के आसपास कार्रवाई करने में परेशानी हुई। टीम ने ग्रामीणों को समझाकर मौके से दूर किया और इसके बाद तेंदुए को सुरक्षित अपने कब्जे में ले लिया।
नदी और घने जंगल के बीच मंडरा रहा था खतरा
सहदेव सिंह यादव ने बताया कि गांव के पास नदी और घना जंगल होने के कारण इलाके में लंबे समय से तेंदुए की सक्रियता बनी हुई थी। तेंदुआ कई पालतू कुत्तों और जंगली जानवरों का शिकार कर चुका था।
ग्रामीणों के मुताबिक, कभी सरकारी अस्पताल के आसपास तो कभी ट्यूबवेल और बाल्मीकि बस्ती में तेंदुए की मौजूदगी देखे जाने से लोगों की चिंता बढ़ती जा रही थी।
अकेले खेत जाने से बच रहे थे ग्रामीण
तेंदुए की लगातार मौजूदगी के कारण ग्रामीणों में इतना डर था कि लोग अकेले खेतों की ओर जाने से बचने लगे थे। किसान समूह बनाकर खेतों में काम करने पहुंच रहे थे। यहां तक कि दिन में भी गांव की सड़कों और खेतों की तरफ जाने वाले रास्तों पर सन्नाटा नजर आता था।
अब तेंदुए के पिंजरे में कैद होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। हालांकि इलाके में तेंदुओं की लगातार सक्रियता को देखते हुए ग्रामीण अभी भी पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं।
