6 लाख की आबादी वाले मोंटेनेग्रो में संसाधन कम थे इसलिए खुद को घरों में बंद कर संक्रमण तोड़ा

Environment Health /Sanitation International

(www.arya-tv.com)पूर्वी यूरोप के बेहद दर्शनीय देश मोंटेनेग्रो में लंबे अर्से के बाद रविवार को चहलकदमी दिखाई दी है। ईस्टर के मौके पर मिली छूट के बाद लोग पूरे एहतियात के साथ सुबह चर्च, रेस्त्रां के बाहर दिखाई दिए। यह कोविड से बुरी तरह प्रभावित देश में जनजीवन के सामान्य होने की पहली तस्वीर है। 6 लाख की आबादी वाले इस देश में हर साल आबादी से तीन गुना पर्यटक आते हैं। यही वजह है कि जब कोरोना की आहट शुरू हुई तो टूरिज्म की वजह से यहां कोरोना सबसे तेजी से फैला और इस देश को सख्त लॉकडाउन लगाना पड़ा।

पूरी दुनिया से खुद को अलग कर लिया। देश की 25 फीसदी इकोनॉमी पर्यटन पर ही निर्भर है और बाकी बड़ा हिस्सा खेती का है। अब इस छोटे से देश ने अपनी देश की इकोनॉमी को उबारने के लिए अपनी सीमाएं खोल दी हैं। इस देश में करीब 10 फीसदी आबादी संक्रमित हो चुकी थी, लेकिन अब स्थिति सामान्य है और हर रोज 150 से कम केस आ रहे हैं।

इस सबका श्रेय यहां की जनता को जाता है, जिसने निर्देशों का पालन किया। अपने आस पड़ोस वालों पर नजर रखी। इस देश के इतने संसाधन नहीं है कि वो पूरी आबादी पर नजर रख सके। देश के आर्थिक विकास मंत्री का कहना है कि जून में मोंटेनेग्रो दुनिया के सबसे सुरक्षित टूरिस्ट स्पॉट में से एक होगा। तब तक देश की 35 फीसदी आबादी का टीकाकरण भी हो चुका होगा।

टीके को लेकर सोच में आया बदलाव, अब यह पहली प्राथमिकता

सीमित संसाधन से लोगों पर नजर रखना संभव नहीं था, लोगों ने खुद को घरों में कैद किया

फिलहाल मोंटेनेग्रो में कोविड के नए मामले तेजी से घट रहे हैं। अब हर 150 से भी कम मामले आ रहे है। इसकी बड़ी वजह यहां की जागरूक जनता रही है। लोगों ने निर्देशों का पालन किया। बहुत जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकले। मास्क और दो मीटर दूरी का पालन किया। यहां सीमित संसाधन के बावजूद सेहत मंत्रालय ने बड़े पैमाने पर वैक्सीन की खरीदी के आर्डर जारी किए हैं। वैक्सीन सेंटरों पर भी अब लोग आ रहे हैं। हालांकि अब तक छोटे बच्चों को टीका नहीं लगाया गया है लेकिन सरकार के प्रस्ताव में जरूर शामिल है।

शुरू में टीका नहीं लगवाना चाहते थे, अब 76 फीसदी आबादी की पहली प्राथमिकता टीका है

इस देश में जनवरी में लोग टीका और साइट इफेक्ट की खबरों से संशय में थे। 40 फीसदी आबादी ही इसके लिए तैयार थी। लेकिन टीके के सकारात्मक प्रभाव के बाद लोगों की सोच में बदलाव आया है। हालिया सर्वे के मुताबिक 76 फीसदी आबादी मानती है कि सरकार औऱ लोगों की पहली प्राथमिकता टीका होना चाहिए। हालांकि, टीके की कमी की वजह से यह देश संघर्ष कर रहा है। सरकार का कहना है कि टीके की आपूर्ति होते ही हम बड़े पैमाने पर सेंटर बनाएंगे ताकि कोई भी व्यक्ति इससे न छूटे। यह हमारी पहली प्राथमिकता है।

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