जगजीत सिंह: 20 वर्षीय बेटे की मौत के बाद छोड़ चुके थे सिंगिंग, लता जी के साथ गाकर की थी वापसी

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(www.arya-tv.com) कोई भी म्यूजिक तब तक हमें सुकून नहीं देता है जब तक वह हमारी रूह तक ना उतर जाए. होंठों से छू लो तुम, तुम को देखा, मेरी जिंदगी किसी और की, मेरे नाम का कोई, जैसे सुपरहिट गाने में अपनी आवाज देने वाले द ग़ज़ल किंग जगजीत सिंह (Jagjit Singh) किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं.

एक सिंगर के रूप में अपनी पूरी जर्नी में, जगजीत सिंह ने 40 से अधिक निजी एल्बम और असंख्य बॉलीवुड गीतों को अपनी आवाज दी थी. हालांकि, हम में से बहुत से लोग वास्तव में ग़ज़ल किंग के जीवन, संघर्ष और उतार-चढ़ाव और उनके करियर के बारे नहीं जानते हैं. तो आइए एक नज़र डालते हैं जगजीत सिंह के जीवन के बारे कुछ अनछुए पहलुओं पर:

जगजीत सिंह का जन्म 8 फरवरी, 1941 को राजस्थान के श्री गंगानगर में सरदार अमर सिंह धीमान के घर हुआ था, जो सरकार के लोक निर्माण विभाग में सर्वेक्षक थे.  जगजीत सिंह की मां सरदारनी बच्चन कौर, जो एक गृहिणी थीं. उनके परिवार में छह भाई-बहन थे (दो भाई और चार बहन). कम लोग जानते हैं कि जगजीत सिंह का असली नाम जगमोहन सिंह धीमान था.

पिता चाहते थे कि जगजीत सिंह नौकरशाह बनें

श्री गंगानगर में खालसा हाई स्कूल और गवर्नमेंट कॉलेज के पूर्व छात्र, जगजीत सिंह ने डीएवी कॉलेज, जालंधर से आर्ट्स की डिग्री हासिल की. जगजीत सिंह के पिता चाहते थे कि वह नौकरशाह (bureaucrat) बनें और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करें. हालांकि, साथ ही उन्होंने उन्हें संगीत सीखने के लिए भी प्रोत्साहित किया.

कहां से जगजीत सिंह के करियर की शुरुआत?

ग़ज़ल किंग ने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत आकाशवाणी के जालंधर रेडियो स्टेशन पर गाने और म्यूजिक कंपोज करके की.

म्यूजिक में करियर के लिए घर छोड़ दिया था

जगजीत सिंह अपने सपने को पूरा करने के लिए 1965 में अपने परिवार को बिना बताए बॉम्बे चले गए. उन्होंने ऐड्स जिंगल्स और शादियों में परफॉर्मेंस जैसे छोटे-छोटे काम करना शुरू कर दिया. वह वर्ली में रहते थे और चार अन्य लोगों के साथ एक कमरा साझा करते थे. जगजीत खाने के लिए दादर जाते थे, जहां एक रेस्तरां के मालिक उन्हें मुफ्त में खाना खिलाया करते थे.

फिल्म में लीड रोल का ऑफर ठुकरा दिया था

कम ही लोग जानते हैं कि जगजीत सिंह को स्ट्रगल के दिनों में एक गुजराती फिल्म में एक लीड रोल का ऑफर भी मिला था. हालांकि, उन्होंने इसे ठुकरा दिया क्योंकि वह केवल सिंगिंग पर ध्यान देना चाहते थे. हालांकि बाद में उन्होंने उस फिल्म के लिए एक भजन गाया था.

जगजीत सिंह की लोकप्रियता की कोई सीमा नहीं थी. यह तब जगजाहिर हुआ, जब साल 1982 में, उनके म्यूजिक इवेंट ‘लाइव एट रॉयल अल्बर्ट हॉल’ के टिकट केवल तीन घंटों में बिक गए थे. बियॉन्ड टाइम, जगजीत सिंह का साल 1987 का एल्बम भारत में पहली डिजिटल रूप से रिकॉर्ड की गई रिलीज़ थी.

बेटे की मौत से सदमा

जगजीत सिंह के कुछ बेहतरीन एल्बम उनके बेटे की मृत्यु की दर्दनाक त्रासदी के बाद आए. उनके दिल में जो दर्द था, वह उनके काम में साफ नजर आ रहा था. ग़ज़ल किंग ने लता मंगेशकर के साथ ‘सजदा’ एल्बम के माध्यम से वापसी की. उसके बाद उन्होंने, ‘समवन समवेयर, होप’, अली सरदार जाफरी के साथ ‘कहकशां’, जावेद अख्तर के साथ सिलसिला, गुलजार के साथ ‘मरसिम’ और ‘संवेदना’ जैसे गाने गाए.

पूर्व प्रधानमंत्री ने खास कनेक्शन

जगजीत सिंह का राजनीति से अनोखा नाता रहा. वह भारत के पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा लिखे गए गीतों को अपनी आवाज देने वाले संगीतकार और गायक थे. एल्बमों को नई दिशा (1999) और सामवेदना (2002) कहा गया. आपको यह भी दिलचस्प लग सकता है कि इन गानों का चेहरा कोई और नहीं बल्कि सुपरस्टार शाहरुख खान थे. वर्ष 2003 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था.

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