फोरेंसिक विज्ञान न्याय व्यवस्था की रीढ़, सत्य के प्रहरी बनें विद्यार्थी : डॉ. राजेश्वर सिंह

Lucknow
लखनऊ। सरोजनी नगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ़ फॉरेंसिक साइंस (यू.पी.एस.आई.एफ.एस.), औरावां-दरोगा खेड़ा, बंथरा में आयोजित ओरिएंटेशन कार्यक्रम “नवारंभ-2026” में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि फोरेंसिक विज्ञान विधि, विज्ञान और मानवीय विवेक का संगम है तथा यह न्याय व्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने विद्यार्थियों से “सत्य के प्रहरी” बनकर कार्य करने का आह्वान किया।
  • फोरेंसिक विशेषज्ञों की बढ़ेगी मांग

डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता के तहत सात वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में फोरेंसिक परीक्षण अनिवार्य होने के बाद उत्तर प्रदेश में हर वर्ष लगभग 72 हजार से 90 हजार मामलों में फोरेंसिक जांच की आवश्यकता होगी। इससे प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ेंगे।

  • साइबर अपराध पर जताई चिंता

उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच देश में लगभग 53 लाख साइबर धोखाधड़ी शिकायतें दर्ज हुईं, जिनसे करीब 56 हजार करोड़ रुपये प्रभावित हुए। वहीं भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की कार्रवाई से 11,158 करोड़ रुपये की धनराशि बचाई गई और हजारों साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी संभव हुई।

  • सत्यनिष्ठा और सटीकता पर दिया जोर

डॉ. राजेश्वर सिंह ने विद्यार्थियों से सत्यनिष्ठा, शुद्धता, निरंतर अध्ययन और पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता को अपने जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि फोरेंसिक विशेषज्ञ की एक रिपोर्ट किसी भी मुकदमे की दिशा बदल सकती है, इसलिए पेशेवर ईमानदारी सर्वोपरि है।

  • सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी को मिलेगा एक लाख रुपये का पुरस्कार

कार्यक्रम में डॉ. राजेश्वर सिंह ने अपने पिता स्वर्गीय आर.बी. सिंह की स्मृति में संस्थान के सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी को प्रतिवर्ष एक लाख रुपये की नकद पुरस्कार राशि देने की घोषणा की। यह सम्मान आगामी बैच से शुरू किया जाएगा।

कार्यक्रम में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण, संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी, प्रमुख सचिव के.एम.एस. सुंदरम, डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमरपाल सिंह सहित संस्थान के अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।