१५ देशों में फैला ओमीक्रॉन वेरिएंट अलग वैक्सीन 2 महीने में; moderna

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(www.arya-tv.com)साउथ अफ्रीका में पाए गए ओमिक्रॉन वैरिएंट पर अफ्रीकी और पश्चिमी देशों में बयानबाजी और एक-दूसरे पर इल्जाम लगाने का दौर शुरू हो गया है। अफ्रीकी देश मलावी के राष्ट्रपति लजारुस चकवेरा ने अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय देशों पर एफ्रोफोबिया से पीड़ित होने का आरोप लगाया है।

ट्रैवल बैन से नाराज हैं लजारुस

चकवेरा इन देशों द्वारा साउथ अफ्रीकी देशों पर लगाए गए ट्रैवल बैन से नाराज हैं। उनका कहना है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट पर साइंस के हिसाब से फैसले नहीं लिए जा रहे हैं। सोमवार को एक फेसबुक पोस्ट में चकवेरा ने कहा- दुनिया को तो साउथ अफ्रीकी वैज्ञानिकों का शुक्रगुजार होना चाहिए जिन्होंने किसी और से पहले ओमिक्रॉन वैरिएंट खोज निकाला। लेकिन, हम पर ही ट्रैवल बैन लगाए जा रहे हैं।

अमेरिका, यूरोप, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया गलत कदम उठा रहे हैं। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि कोविड पर फैसले साइंस के आधार पर लिए जाने चाहिए, एफ्रोफोबिया से पीड़ित होने की जरूरत नहीं है।

  वैक्सीन 2 महीने में तैयार कर लेंगे ;मॉडर्ना
मॉडर्ना वैक्सीन कंपनी ने कहा है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट के लिए स्पेशल वैक्सीन (ओमिक्रॉन स्पेसेफिक) 2 से 3 महीने में तैयार हो जाएगी। साउथ अफ्रीका में कोरोना के नए वैरिएंट की वजह से दुनिया परेशान है। वैक्सीन कंपनियां अब तक दावे से यह नहीं कह पा रही हैं कि मौजूदा वैक्सीन इस नए वैरिएंट को काबू करने में कारगर साबित होंगी।

पॉल बर्टन ने कहा- हम हालात पर नजर रख रहे
मॉडर्ना के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर पॉल बर्टन ने कहा- हम हालात पर नजर रख रहे हैं। फिलहाल, सिर्फ यही कह सकता हूं कि अगर ओमिक्रॉन के लिए अलग से वैक्सीन की जरूरत हुई तो यह कुछ हफ्तों में तैयार कर ली जाएगी। कुछ हफ्तों में तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। साइंटिस्ट्स इस वैरिएंट और वैक्सीन एफिशिएंसी पर रिसर्च कर रहे हैं। हम उन लोगों के सैम्पल्स की जांच भी कर रहे हैं, जो वैक्सीनेट होने के बावजूद इस वैरिएंट से पॉजिटिव हो गए।

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