बसपा में फिर तेज हुआ सियासी संग्राम : आकाश आनंद आउट, अशोक सिद्धार्थ पर मायावती का बयान

# ## Lucknow

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने गुरुवार को अपने भतीजे और पूर्व राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह से मुक्त करने की घोषणा की है। साथ ही उन्होने अपने समधी अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने के फैसले को ‘अति-देर से उठाया गया सही कदम’ बताया है।

मायावती ने पोस्ट 10 बिंदुओं में लिखा

बसपा सुप्रीमों मायावती ने गुरुवार को एक्स पर 10 बिंदुओं में विस्तृत पोस्ट कर अपना पक्ष रखा।

उन्होंने लिखा कि अशोक सिद्धार्थ अगर यह फैसला काफी पहले ले लेते तो बसपा, बहुजन समाज, बहुजन मूवमेंट और उनके दामाद आकाश आनंद को लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता और न ही उन्हें विधानसभा आम चुनाव व खासकर यूपी में पांचवीं बार सरकार बनाने की तैयारियों के बीच कड़े फैसले लेने पड़ते।

बसपा प्रमुख ने कहा कि बसपा की अंबेडकरवादी राजनीति की परम्परा त्याग, तपस्या, संघर्ष और निजी-पारिवारिक स्वार्थ से दूर रहने की रही है, जिसे कांशीराम जी की तरह वह भी समर्पित हैं।

उन्होंने कहा कि महान लक्ष्य के लिए बड़ी कुर्बानी की जरूरत होती है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अशोक सिद्धार्थ को अगर सच में आकाश आनंद के उज्ज्वल भविष्य और पार्टी हित की चिंता होती तो वे बिना देरी किए तुरंत संन्यास की घोषणा कर देते, जिससे आकाश की सक्रियता सुनिश्चित हो सकती थी। ऐसा न करना उनकी नीयत में खोट और अभिलाषा बरकरार रहने को साबित करता है।

आकाश आनंद की वफादारी पर उठाए सवाल

मायावती ने आकाश आनंद पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अपने करियर से अधिक अपने ससुर के प्रति लगाव दिखाया है और बसपा प्रमुख के सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर उनके ही भलाई के लिए किए गए पोस्ट को रीपोस्ट तक करना उचित नहीं समझा, जबकि पहले वे वफादारी का सबूत देने के लिए पोस्ट रीपोस्ट करते रहे हैं।

मायावती ने सभी जिम्मेंदारियों से किया मुक्त

इसी आधार पर मायावती ने घोषणा की कि जैसे दिनांक 3 सितंबर 2026 को आकाश आनंद को पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के अति-महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया था, उसी प्रकार अब उन्हें पार्टी से भी आज से पूरी तरह से फ्री (आजाद) कर दिया गया है। यदि वे स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं।

आखिर में क्या बोलीं

अंत में उन्होंने कार्यकर्ताओं से विरोधियों के साम, दाम, दंड, भेद आदि हथकंडों का डटकर सामना करते हुए यूपी में फिर से ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की कानून-व्यवस्था और विकास वाली सरकार बनाने के संघर्ष में पूरे तन-मन-धन से लगने का आह्वान किया।