जिला अस्पताल के आधे परिसर में दो दिन से पानी की आपूर्ति ठप पड़ने से मरीज और तीमारदारों में हाहाकार मचा है। अस्पताल के आरओ प्लांट शोपीस बने हुए हैं। टोटियां उखड़ चुकी हैं। पानी की कमी के कारण शौचालय चोक हो गए हैं। सफाई की व्यवस्था भी चरमराने लगी है।गर्मी की तेज धूप में लोग घरों से पानी लाकर या खरीद कर पीने और इस्तेमाल के लिए मजबूर हैं।
जिला अस्पताल मरीजों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। इन दिनों पानी की भारी कमी से जूझ रहा है। दो दिन से नल सूखे पड़े हैं। ईएनटी वार्ड, रिजर्व वार्ड और जनरल वार्ड के आसपास स्थिति सबसे खराब है। यहां मरीज और उनके परिजन तेज धूप में बाल्टी-बर्तन लेकर पानी ढो रहे हैं। ब्लड बैंक के पास लगा वाटर कूलर बंद पड़ा है। थैलेसीमिया वार्ड के बगल में एक वर्ष पहले लगाया गया आरओ प्लांट भी बंद है। रसोईघर के पास बना आरओ और जनरल वार्ड के बगल वाला आरओ प्लांट भी पानी नहीं दे रहा। नलों से टोटियां गायब हैं। कई जगह जमी हुई काई नजर आ रही है। ऑक्सीजन प्लांट के बगल से हैंडपंप भी हटा लिया गया है, जिससे गंभीर मरीजों के परिजनों को और परेशानी हो रही है। अब सिर्फ जेनेरिक दवा केंद्र के बगल लगे आरओ व हैंडपंप से ही पानी की उम्मीद है। मेडिकल वार्ड के पास लगा वाटर कूलर कब दगा दे जाए। इसका भरोसा नहीं है।
भइया हम काव बोली, इलाजव न करिहै
अमृत विचार ने जब मंगलवार को वार्डों ने पेयजल के लिए जूझ रहे मरीज व तीमारदारों से बात करने का प्रयास किया तो सब डरे सहमे दिखाई पड़े। ईएनटी वार्ड में मौजूद लोग पानी को लेकर अस्पताल प्रशासन को कोस रहे थे, लेकिन कैमरे के सामने आने से सभी मना कर रहे थे। कहना था कि भइया अब काव बोल देई। का पता पेपर म फोटू छप जाए के बाद अस्पताल से भगाय दें। फिर इलाजव न मिले। तुहिन देख ल्यो, हिया कतनी दिक्कत अहय। दुई दिन से बड़ी दिक्कत है। तीमारदार साहिल अपनी मां को सर्जरी के डॉक्टर को दिखाने गए थे। जब उन्हें प्यास लगी तो वह ब्लड बैंक के पास लगे वाटर कूलर के पास गए। देखा तो सूखा पड़ा था। तीमारदार पंकज ने बताया ईएनटी वार्ड के बगल शौचालय चोक है। आदमी कहां जाएगा।
पानी 20 से 25 रुपये बोतल
भले ही जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को एक रुपये में इलाज का दावा किया जा रहा है, लेकिन पानी के लिए उन्हें एक बोतल के लिए 20 से 25 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। जगह-जगह पानी न आने से मरीजों को होती परेशानी देख तीमारदार बाहर से पानी खरीदकर लाने को भी मजबूर हैं। बताते हैं कि कई लोग इसका फायदा उठाकर बाहर से पानी लाकर 25 रुपये बोतल बेच रहे हैं।
बनवाने की सुधि भी नहीं ले रहे अधिकारी
रसोईघर के बगल लगा बड़ा आरओ प्लांट करीब दो वर्षों से बंद पड़ा है। इधर से रोज अधिकारियों का आना-जाना भी रहता है, लेकिन उसकी मरम्मत कराने की कोई सुधि नहीं ले रहा है।
