यूपी रोडवेज की बसों का संचालन अब AI से होगा: 30 करोड़ की लागत से जुड़ेगा 120 डिपो का नेटवर्क, यात्रियों का इंतजार होगा कम

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उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपी रोडवेज) की बस सेवाओं को आधुनिक और सुगम बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब प्रदेश भर में रोडवेज बसों का संचालन और नियंत्रण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के जरिए किया जाएगा। इस पूरी परियोजना पर लगभग 30 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसके तहत एआई आधारित डिपो प्रबंधन एवं बस संचालन नियोजन प्रणाली विकसित होगी। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने इस हाइटेक प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन के लिए आधिकारिक निविदाएं (Tenders) आमंत्रित कर दी हैं।

120 डिपो की 14,300 बसें होंगी केंद्रीकृत, यात्रियों को हर 15 मिनट में मिलेगी सुविधा

उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बुधवार को बताया कि वर्तमान में प्रदेश भर में परिवहन निगम के 120 डिपो संचालित हैं। इन डिपो के माध्यम से लगभग 14,300 बसों का बेड़ा प्रतिदिन 17 लाख से अधिक यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाता है। नई एआई व्यवस्था लागू होने से सभी डिपो की समय-सारिणी को एक ही केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया जाएगा।

एआई सिस्टम यात्रियों की वास्तविक संख्या, विभिन्न मार्गों पर मांग के रुझान, यात्रा में लगने वाले समय और डिपो में उपलब्ध बसों का सटीक विश्लेषण करेगा। यदि किसी व्यस्त मार्ग पर हर 15 मिनट में बस की आवश्यकता होगी, तो अलग-अलग डिपो की बसों के समय का समन्वय इस प्रकार किया जाएगा कि यात्रियों को बिना किसी रुकावट के निश्चित समय अंतराल पर बसें मिलती रहें।

बसों और कर्मचारियों का होगा डिजिटल प्रबंधन, बढ़ेगी निगम की आय

नई एआई प्रणाली केवल रूट तय करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके माध्यम से बसों के रखरखाव, सर्विसिंग, मरम्मत कार्यों और चालक-परिचालकों (Drivers & Conductors) की ड्यूटी का भी पूरी तरह से डिजिटल प्रबंधन किया जाएगा। परिवहन निगम मुख्यालय और क्षेत्रीय अधिकारी एक सिंगल डैशबोर्ड से बसों के आवागमन और डिपो के प्रदर्शन की निगरानी करेंगे।

परिवहन मंत्री के अनुसार, समय-सारिणी में सुधार और नियमित बस सेवाओं के मिलने से जहां एक ओर यात्रियों की संख्या में इजाफा होगा, वहीं दूसरी ओर निगम के राजस्व में भी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। यह महत्वाकांक्षी योजना केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (ITS) योजना के तहत लागू की जा रही है।