सरकारी नौकरी के लिए चयनित अभ्यर्थियों को अब चरित्र सत्यापन रिपोर्ट के इंतजार में नियुक्ति के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। योगी सरकार ने चरित्र एवं पूर्ववृत्त सत्यापन की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए एकीकृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सामान्य पदों पर सत्यापन लंबित रहने के बावजूद शर्तों के साथ नियुक्ति पत्र जारी किया जा सकेगा। रिपोर्ट अनुकूल मिलने पर नियुक्ति की पुष्टि होगी। पुलिस और संबंधित अधिकारियों को सत्यापन रिपोर्ट 30 दिन में देनी होगी।
प्रमुख सचिव कार्मिक एम. देवराज की ओर से जारी शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि केवल सत्यापन रिपोर्ट लंबित होने के कारण नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया नहीं रोकी जाएगी। हालांकि, सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील पदों पर विस्तृत सत्यापन पूरा होने के बाद ही नियुक्ति दी जाएगी। ऐसे मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत मुख्यमंत्री का पूर्व अनुमोदन लेना होगा। सामान्य मामलों में पुलिस या स्थानीय अभिसूचना इकाई अभ्यर्थियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए नहीं बुलाएगी। घर जाकर पूछताछ और अतिरिक्त दस्तावेज मांगने की भी जरूरत नहीं होगी। पुलिस उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर सत्यापन करेगी। विशेष परिस्थितियों में नियुक्ति प्राधिकारी के अनुरोध पर जिलाधिकारी मौके पर जांच करा सकेंगे।
पुलिस महानिदेशक (अभिसूचना) और संबंधित जिलाधिकारियों को सत्यापन संबंधी संदर्भ मिलने के 30 दिन के भीतर रिपोर्ट देनी होगी। देरी होने पर नियुक्ति प्राधिकारी मामला गृह विभाग को भेजेंगे, जो रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। नई नीति सरकारी विभागों के साथ निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्त निकायों, सरकारी उपक्रमों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती पर लागू होगी। पहले से लंबित मामलों का निस्तारण भी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।
केवल एफआईआर से नहीं छिनेगा नौकरी का अवसर
केवल एफआईआर दर्ज होने, विवेचना लंबित रहने या आरोपपत्र दाखिल होने से अभ्यर्थी स्वतः अयोग्य नहीं होगा। पात्रता का निर्णय अपराध की प्रकृति, निर्धारित श्रेणी और न्यायालय में मामले की स्थिति के आधार पर होगा। अभ्यर्थियों को अपने विरुद्ध दर्ज मामलों की सही जानकारी देनी होगी। तथ्य छिपाने या गलत घोषणा करने पर नियुक्ति निरस्त करने और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।
प्रतिकूल रिपोर्ट पर मिलेगा सुनवाई का मौका
पुलिस की रिपोर्ट प्रतिकूल होने पर भी अभ्यर्थी को पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। जिलाधिकारी नियुक्ति प्राधिकारी को रिपोर्ट भेजने से पहले सुनवाई करेंगे। यह प्रक्रिया ऑनलाइन भी हो सकेगी। पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का दोबारा सत्यापन नहीं होगा, हालांकि जरूरत पड़ने पर उनके पूर्व विभाग से जानकारी ली जा सकेगी। पिछले पांच वर्षों में उत्तर प्रदेश से बाहर किसी स्थान पर एक वर्ष या अधिक समय तक रहने वाले अभ्यर्थियों के संबंध में संबंधित राज्य की पुलिस से भी सत्यापन कराया जाएगा।
