मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने में तैनात दरोगा अंकित सागर और हेड कांस्टेबल नीरज कुमार को गुरुवार शाम निलंबित कर दिया गया। दोनों पर नोएडा के फर्नीचर कारोबारी शाहिद चौधरी को अवैध रूप से हिरासत में रखकर 4.72 लाख रुपए वसूलने का आरोप है।
कारोबारी ने डीआईजी रेंज कलानिधि नैथानी से शिकायत की थी। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति ने दोनों पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की।
मामले में थाने के सामने जनसुविधा केंद्र चलाने वाले शादाब राव उर्फ शालू और मेरठ में तैनात रह चुके दरोगा आरिफ अली की भूमिका भी सामने आई है। एसएसपी ने मामले की जांच एसपी सिटी विनायक गोपाल भोंसले को सौंपी है।
नोएडा के सेक्टर-93 गेझा निवासी फर्नीचर कारोबारी शाहिद चौधरी ने 21 अक्टूबर को डीआईजी से शिकायत की। उन्होंने बताया कि 2 अगस्त को लिसाड़ी गेट थाने से फोन कर उन्हें मेरठ बुलाया गया था। इसके कुछ देर बाद उनका बैंक खाता फ्रीज हो गया।
शाहिद के मुताबिक, मेरठ पहुंचने पर दरोगा अंकित सागर और हेड कांस्टेबल नीरज कुमार ने उनके साथ अभद्रता की और लॉकअप में बंद कर दिया। उनका महंगा फोन, घड़ी और बेल्ट भी ले ली गई। भाई सन्नवर और जाबिर थाने पहुंचे तो उनसे रकम की मांग की गई।
शिकायत के मुताबिक, 4 अगस्त को पहले 1.20 लाख रुपए शादाब राव के बैंक खाते में ट्रांसफर कराए गए। इसके बाद 2.80 लाख रुपए नकद दिए गए। रकम मिलने के बाद शाहिद का आईफोन 17 लौटा दिया गया, लेकिन घड़ी और बेल्ट वापस नहीं की गईं।
शाहिद ने आरोप लगाया कि अगले दिन दरोगा और हेड कांस्टेबल ने अफसर को देने के नाम पर सोफा मांगा। उन्होंने सोफे की फोटो और दो क्यूआर कोड भेजे। इसके बाद मोहम्मद इमरान और सुशीला के नाम वाले खातों में 36-36 हजार रुपए भेजने को कहा गया।
शाहिद ने आरोप लगाया कि उनका बैंक खाता फ्रीज कर रकम देने का दबाव बनाया गया। उनके मुताबिक, 7 अगस्त को शादाब राव की ओर से ईमेल भेजकर खाते को दोबारा चालू कराने के लिए बैंक को किए गए पत्राचार की जानकारी दी गई।
कारोबारी ने शादाब पर पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर अवैध वसूली करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि शादाब थाने के सामने जनसुविधा केंद्र चलाता है और पुलिसकर्मियों के संपर्क में रहता है। शाहिद ने कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य दस्तावेज भी डीआईजी को सौंपने की बात कही है।
