लखनऊ। सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने महिला-सम्मान, महिला आरक्षण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर कांग्रेस एवं समाजवादी पार्टी की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण की वास्तविक परीक्षा नारों और भाषणों से नहीं, बल्कि उनके अधिकारों, गरिमा, स्वतंत्रता और निर्णय-प्रक्रिया में भागीदारी से होती है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों, शाह बानो प्रकरण और तीन तलाक के मुद्दे पर कांग्रेस के रुख का उल्लेख करते हुए महिला अधिकारों के मामले में समान मानदंड अपनाने की मांग की। महिला आरक्षण पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को विधायिकाओं में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने के सवाल पर सभी राजनीतिक दलों को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
- महिला-सम्मान पर समान मानदंड अपनाने की जरूरत
डॉ. राजेश्वर सिंह ने कहा कि महिला चाहे किसी भी धर्म, राजनीतिक दल या विचारधारा से जुड़ी हो, उसकी गरिमा और अधिकारों के प्रति समान संवेदनशीलता जरूरी है। उन्होंने एक महिला सांसद के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, महिला-सम्मान के मुद्दे पर राजनीतिक सुविधा के आधार पर प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, स्वतंत्रता और अधिकारों के सवाल पर सभी दलों को स्पष्ट एवं सुसंगत रुख अपनाना चाहिए।
- महिला आरक्षण पर राजनीतिक दलों से मांगा जवाब
महिला आरक्षण के मुद्दे पर विधायक ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर महिला सशक्तीकरण की बात करने वाले दलों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने के प्रस्तावों पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। कांग्रेस शासित राज्यों में मंत्रिमंडलों में महिलाओं की भागीदारी का मुद्दा उठाते हुए भी उन्होंने राजनीतिक दलों से जवाबदेही की मांग की। उनका कहना था कि महिलाओं को केवल मतदाता के रूप में नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाली नेतृत्वकारी भूमिका में भी पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए।
- सपा के पुराने बयानों और महिला आरक्षण संबंधी रुख पर सवाल
डॉ. सिंह ने समाजवादी पार्टी के इतिहास का उल्लेख करते हुए मुलायम सिंह यादव की महिलाओं से संबंधित विवादास्पद टिप्पणी, आजम खान की तत्कालीन सांसद रमा देवी के प्रति टिप्पणी और महिला आरक्षण पर पार्टी के पुराने रुख को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से महिलाओं के अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी पर पार्टी की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि महिलाओं की गरिमा और समान अधिकार किसी राजनीतिक दल की सुविधा पर निर्भर नहीं होने चाहिए।
- महिलाओं की स्वतंत्रता, शिक्षा और सुरक्षा को बताया जरूरी
डॉ. राजेश्वर सिंह ने अंतरराष्ट्रीय संदर्भों का उल्लेख करते हुए अफगानिस्तान में महिलाओं की शिक्षा एवं रोजगार पर प्रतिबंधों और हमास के 7 अक्टूबर के हमले के दौरान महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की घटनाओं पर समान रूप से आवाज उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि महिलाओं की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए और किसी भी प्रकार का धार्मिक या राजनीतिक दबाव उनकी स्वतंत्रता को बाधित नहीं करना चाहिए।
- ‘नारी-शक्ति को अधिकार और अवसर देना ही असली परीक्षा’
डॉ. सिंह ने कहा कि महिला सशक्तीकरण का अर्थ केवल भाषणों में नारी-शक्ति का उल्लेख करना नहीं, बल्कि महिलाओं को अधिकार, अवसर, सम्मान और निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को स्पष्ट करना चाहिए कि महिला अधिकारों, सुरक्षा, शिक्षा और प्रतिनिधित्व के मुद्दों पर उनकी प्रतिबद्धता क्या है। उनके मुताबिक, महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए नारों के साथ ठोस नीतिगत कदम और राजनीतिक भागीदारी के समान अवसर भी जरूरी हैं।
