बीबीएयू में साइबर जागरूकता कार्यक्रम, ‘साइबर शक्ति’ पुस्तिका का विमोचन; विद्यार्थियों को बताए साइबर अपराध से बचाव के तरीके

Lucknow

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DIT) और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, लखनऊ के संयुक्त सहयोग से साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की पहल के तहत आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम नागरिकों को साइबर सुरक्षा, डिजिटल जागरूकता तथा ऑनलाइन अपराधों के प्रति सजग करना रहा। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने ‘साइबर शक्ति’ पुस्तिका का विमोचन किया। पुस्तिका के माध्यम से लोगों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।

  • डिजिटल युग में साइबर जागरूकता जरूरी

कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने साइबर जागरूकता को वर्तमान डिजिटल युग की अनिवार्य आवश्यकता बताते हुए विद्यार्थियों से तकनीकी ज्ञान के साथ जिम्मेदारी, विवेकशीलता और नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इंटरनेट और डिजिटल तकनीक ने शिक्षा, शोध तथा संचार के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं खोली हैं, लेकिन इनके सुरक्षित उपयोग पर ध्यान देना भी जरूरी है। विद्यार्थियों को साइबर खतरों की पहचान करने और समाज में डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

  • डार्क वेब, फिशिंग और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव की जानकारी

कार्यक्रम में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों साक्षी कश्यप, प्रियांशु शेखर सिंह, सत्यम पांडेय, रवि शंकर और शुभम राजेंद्र बिष्ट ने साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी। विशेषज्ञों ने डार्क वेब की अवधारणा, उससे जुड़े संभावित जोखिमों और अवैध ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता बताई। इसके साथ ही फिशिंग, पहचान की चोरी, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, मैलवेयर, रैनसमवेयर और सोशल इंजीनियरिंग जैसे साइबर अपराधों से बचाव के उपायों पर भी चर्चा की गई।

  • मजबूत पासवर्ड और मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अपनाने की अपील

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की विभागाध्यक्ष मेजर प्रो. राजश्री ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विशेषज्ञों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक इंटरनेट उपयोगकर्ता की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखने, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) अपनाने, संदिग्ध लिंक और अज्ञात अटैचमेंट से बचने, सॉफ्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट करने तथा व्यक्तिगत एवं वित्तीय जानकारी साझा करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी।

  • विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की रही उपस्थिति

कार्यक्रम में कर्नल ए. एस. गौतम, डिप्टी ग्रुप कमांडर एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, ग्रुप मुख्यालय लखनऊ; कमांडर एस. पी. यादव, कमांडिंग ऑफिसर, 3 यूपी नेवल यूनिट एनसीसी; प्रो. ओ. पी. विश्वकर्मा शुक्ला, विभागाध्यक्ष, लोक प्रशासन विभाग; लेफ्टिनेंट डॉ. मनोज डडवाल और डॉ. अर्पित शैलेष सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में इतिहास विभाग की सहायक आचार्य डॉ. रेनू पांडेय ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होकर विशेषज्ञों को प्रशंसा पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने और साइबर अपराधों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया। ‘साइबर शक्ति’ पुस्तिका का विमोचन डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा साइबर-सुरक्षित समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।