पीडब्ल्यूडी के निर्माण खंड भवन में एरियर भुगतान के नाम पर हुए 1.28 करोड़ के घोटाले में करीब 89 लाख रुपये की वसूली कर ली गई है। विभागीय जांच में तत्कालीन अधिष्ठान लिपिक अभिषेक सक्सेना की भूमिका प्रमुखता से सामने आने की बात कही जा रही है। उसने ही लग कर्मचारियों के खातों में रकम ट्रांसफर की थी। दूसरी ओर, कोतवाली पुलिस को दी गई शिकायत की प्रक्रिया को लेकर भी पेच फंस गया है। छह लोगों के नाम से तैयार तहरीर पर हस्ताक्षर केवल एक्सईएन अब्दुल सत्तार के होने के कारण पुलिस ने नए सिरे से तहरीर मांगी है, जो पांच दिन बाद भी नहीं दी गई है।
निर्माण खंड भवन में 1.28 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला कर्मचारियों के एरियर और वेतन भुगतान से जुड़ा है। विभागीय स्तर पर हुई जांच में तत्कालीन अधिष्ठान लिपिक अभिषेक सक्सेना को इस पूरे प्रकरण का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। रकम वापसी को लेकर भी अहम तथ्य सामने आए हैं। जांच में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी देवदत्त ने बताया कि उसके वेतन खाते में 2,15,166 रुपये आए थे। उसने अभिषेक को फोन किया तो उसने बताया कि रकम गलती से ट्रांसफर हो गई है। कुछ दिन बाद उसने बैंक में बुलाकर अभिषेक को रकम लौटा दी।रकम निकालने और लौटाने का विवरण उसकी बैंक पासबुक में दर्ज है। उसने 500 रुपये अतिरिक्त देने की बात भी कही है। अभिषेक ने स्पष्टीकरण दिया कि त्रुटिवश उससे यह चूक हुई।
कमेटी में खंड के अधिकारी शामिल करने पर सवाल
आरोप लग रहे हैं कि अधिकारियों और बाबुओं की भूमिका की जांच के लिए एक्सईएन ने अपने ही खंड में अलग-अलग तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है जिसमें सहायक अभियंता से लेकर, खंडीय लेखाधिकारी आदि शामिल हैं। दूसरी, तरफ शासन स्तर से भी तीन सदस्यीय कमेटी मामले की जांच कर रही है। जांच कमेटी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों-कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए हैं। प्रकरण से संबंधित सभी दस्तावेज तलब कर उनकी समीक्षा की गई है। अगले हफ्ते तक जांच पूरी हो जाएगी।
