शहर के अमीनाबाद, चौक, हजरतगंज जैसे प्रमुख बाजारों में जर्जर भवनों में कारोबार चल रहा है। इसके अलावा लोग इन जर्जर इमारतों में जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं। बारिश के दौरान घनी आबादी वाले इन क्षेत्रों में जर्जर भवन कभी भी गिर सकते हैं, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है।
इन जर्जर भवनों पर आखिर नगर निगम की कार्रवाई कब होगी यह बताने वाला कोई नहीं। नगर निगम इन जर्जर भवन मालिकों व किरायेदारों को केवल नोटिस देने तक सीमित है। नोटिस में नगर निगम भवन स्वामी को जर्जर बिल्डिंग की मरम्मत करा लेने के साथ दुर्घटना होने पर उनकी जवाबदेही तय कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है।
इसके अलावा जर्जर भवनों में किरायेदारी और मालिकाना हक को लेकर न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के कारण कार्रवाई न हो पाने का हवाला दिया जा रहा है। वहीं दिल्ली में सत्य निकेतन हॉस्टल की पांच मंजिला जर्जर बिल्डिंग गिरने के बाद नगर निगम फुल एक्शन में है। कई इमारतों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जारी है।
गुईन रोड पर जर्जर बिल्डिंग तोड़नी पड़ी थी भारी
नगर निगम को लगभग 3 वर्ष पहले अमीनाबाद क्षेत्र के गुईन रोड स्थित एक जर्जर भवन को तोड़ना भारी पड़ गया। भवन स्वामी ने उच्च न्यायालय में इसकी शिकायत की तो अभियंताओं की पेशी हुई और जमकर फटकार पड़ी। इसके बाद से नगर निगम ने जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी तरह बंद कर दी।
हम किसी की निजी प्रॉपर्टी को नहीं तोड़ सकते हैं। इसका हमारे पास कोई अधिकार नहीं है। भवन स्वामी को नोटिस जारी करके सचेत किया जाता है और बिल्डिंग की मरम्मत करा लेने के निर्देश दिए जाते हैं।-अतुल मिश्रा, नगर अभियंता नगर निगम जोन 1
